रोमांचक हिंगोट युद्ध में कई लोग घायल

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इंदौर: दिवाली(Diwali)  के दूसरे दिन इंदौर(Indore)  में सोमवार की शाम परंपरागत और रोमांचक हिंगोट युद्ध(Hingot war) का आयोजन किया गया। इस आयोजन में क्षेत्र के तुर्रा(Turra Dal) और कलंगी दल(Kalangi Dal) के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे पर जलते हुए हिंगोट से हमला किया।इस दौरान जलते हिंगोट की चपेट में आने से करीब 38 लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है। जिसमें से दो लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है. गौतमपुरा हिंगोट युद्ध में कई लोगों की जेब भी कट गई। वहीं हिंगोट युद्ध देखने जा रहे दो पहिया वाहन सवार दुर्घटना में शिकार हो गए थे। मौके से गुजर रहे हातोद एसडीएम रजनीश श्रीवास्तव ने अपने गाड़ी से उन्‍हें उपचार के लिए सरकारी अस्पताल भेजा। जबकि इस बार पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा पुलिस बल (Police force) लगाया था. यही नहीं पहली बार इंदौर से वज्र वाहन बुलवाया गया था.

 

 

जानकारी के अनुसार इंदौर से लगभग 60 किलोमीटर दूर गौतमपुरा में वर्षों पुरानी परंपरा को निभाते हुए हिंगोट युद्ध का आयोजन हुआ. देवनारायण मंदिर के सामने युद्ध मैदान पर गांवों के योद्धा आपस में भिड़े और एक-दूसरे पर खूब अग्निबाण चलाए. दीपावली के अगले दिन सोमवार को गोवर्धन पूजा के दिन शाम 4 बजे तुर्रा-गौतमपुरा और कलंगी-रूणजी के निशान लिए दो दल सज-धजकर ढोल-ढमाकों के साथ झूमते हुए योद्धा कंधों पर थैले में भरे हिंगोट, एक हाथ में ढाल और दूसरे में जलती बांस की कीमची लिए बड़नगर रोड के देवनारायण मंदिर पहुंच गए. इसके बाद एक दूसरे पर अग्निबाण फेंकने की शुरूआत हो गई. दोनों छोर से योद्धाओं ने एक-दूसरे पर जलते हिंगोट फेंकने शुरू कर दिए. करीब सवा घंटे तक चले युद्ध के दौरान जलता तीर लगने से कुछ 38 लोग झुलस गए. इस युद्ध को देखने के लिए देश के कोने कोने  से लोग आये हुए थे।

हिंगोट युद्ध को लेकर जिला प्रशासन ने इस बार ख़ास इंतजाम किये थे किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल गौतमपुरा भेजा गया।इसके साथ ही एंबुलेस और फायर ब्रिगेड भी मौके पर तैनात किया गया। हिंगोट युद्ध में हर साल कई लोग घायल होते हैं और 2017 में तो एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है. इसलिए इस बार हिंगोट युद्ध के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. थ्री लेयर में बेरीकेटिंग कराई गई थी. साथ ही 8 फुट ऊंची बेरीकेटिंग लगाई गई. लेकिन उसके बाद भी 38 लोग घायल हो गए। आयोजन देखने के लिए निर्धारित समय शाम पांच बजे से काफी पहले ही दर्शक मैदान पर जमा हो गए थे जबकि आयोजन आरंभ होने पर मैदान दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था।

-Mradul tripathi

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