इसलिए बढ़ रही हैं दुष्कर्म की घटनाएं

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बेटियों को नहीं बेटों को समझाएं कि वे किसी के साथ दुष्कर्म कर अपने परिवार और समाज का नाम बदनाम नहीं करें। सभी सामाजिक और स्वैच्छिक संगठन मिलकर अभियान चलाएं ताकि दुष्कर्म की घटनाएं किसी भी कीमत पर न हो। शहर में जहां-जहां नशीले पदार्थों की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है, वहां पुलिस प्रशासन द्वारा छापामार कार्रवाई की जाए ताकि इन पर लगाम लग सके।

ये विचार विभिन्न सामाजिक एवं स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रबुद्धजन के हैं, जो  इंदौर प्रेस क्लब और ‘सेवा सुरभि’ द्वारा आयोजित ‘बच्चियों के साथ होती बदसलूकी और शर्मसार होता समाज’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में बेबाकी से बोल रहे थे।

नशीले पदार्थों पर हो पूर्ण प्रतिबंध

सीआरपीएफ के पूर्व डीजीपी एनके त्रिपाठी ने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार समाज में 30 प्रतिशत दुष्कर्म की घटनाएं परिवार के लोग या नजदीकी रिश्तेदार करते हैं। 10 प्रतिशत भाई-बहनों के दोस्त और इतने ही एकदम अपरिचित लोग उत्तेजना में आकर ऐसे दुष्कार्य करते हैं। पूर्व आईजी आशा माथुर ने कहा कि दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए हमें परिवारों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है साथ ही कानून का ज्ञान होना भी जरूरी है। जरूरत इस बात है कि हमारे समाज में जितने भी अधिक सामाजिक और स्वैच्छिक संगठन हैं, वे सभी मिलकर क्षेत्रवार बैठकें करें ताकि किसी भी मोहल्ले या कॉलोनी में कभी भी छेडख़ानी या दुष्कर्म की घटनाएं न हों। सभी वक्ताओं ने माना कि नशीले पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए|

बेटों  को सीख की ज़रूरत

पद्मश्री जनक पलटा ने कहा कि देवी अहिल्या की नगरी को क्या हो गया। तीन वर्ष की बच्ची के साथ भी बदसलूकी हो रही है। जरूरत है कि हम बेटियों के बजाय बेटों को सिखाएं कि वे किसी बच्ची के साथ बदसलूकी कर अपना और परिवार सहित शहर का मुंह काला नहीं करे।

विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि हमें बच्चों में आध्यात्मिक शिक्षा को जगाने की जरूरत है। विधायक सुदर्शन गुप्ता ने कहा कि समाज में विश्वास का संकट गहराता जा रहा है। जो दुष्कर्मी हैं, उनके परिजन का समाज बहिष्कार करे। ई-कोर्ट बार अध्यक्ष अजय बागडिय़ा ने कहा कि पीडि़ता की रिपोर्ट थाने में तुरंत लिखी जाए और यह कार्य महिला पुलिसकर्मी करे। उसका मेडिकल एक्जामिनेशन भी महिला डॉक्टर द्वारा हो और उस समय वहां कोई पुरुष नहीं हो।

युवा पीढ़ी के मन पर शैतान काबिज़

शहर काजी इशरत अली ने कहा कि जब से स्मार्टफोन आया है और डाटा सस्ता हुआ है, तब से लोग इन स्मार्टफोन पर पोर्न साइट देखते हैं, जिससे युवा पीढ़ी के मन पर शैतान काबिज़ हो गया है। एडिशनल एसपी वाहिनी सिंह ने कहा कि स्मार्टफोन के नुकसान से ज्यादा फायदे हैं। अत: यह कहना कि इंटरनेट के कारण समाज में विकृति आ रही है, गलत है। ब्रह्माकुमारी बहन उर्मिला दीदी ने कहा कि हमारे शरीर के हर अंग पर तो हमारा नियंत्रण है, लेकिन मन पर नहीं जबकि मन एक बीज है, जिसे समझने की जरूरत है। परिचर्चा में समाजसेवी किशोर कोडवानी, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अर्चना जायसवाल, श्रुति अग्रवाल,वरिष्ठ कांग्रेस नेता केके मिश्रा, छात्र नेता दक्षिता गढ़वाल, राहुल माथुर भाजपा नेता राजेश अग्रवाल, एडवोकेट शन्नो शगुफ्ता खान सहित अन्य कई गणमान्य नागरिकों और प्रबुद्धजन ने अपनी बात कही|

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