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इंदौर के कोचिंग संस्थानों की काली सच्चाई टैलेंटेड इंडिया की ज़ुबानी

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पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया , इस पंक्ति का मतलब साफ़ है कि खुद की, घर-परिवार , की समाज की तरक्की के लिए पढ़ना बेहद ज़रूरी है,  लेकिन क्या पढ़े ? कैसे पढ़े ?  किससे पढ़े ? ये सवाल ना केवल विद्यार्थी,  बल्कि उनके अभिभावकों को भी सताता और डराता है।  ख़ासतौर पर जब बात प्रशासनिक सेवा की तैयारियों के लिए सही कोचिंग क्लास (Indore Coaching Center Fraud ) चुनने की हो, इसी बात को लेकर टैलेंटेड इंडिया न्यूज़ ने की है एक खास जांच पड़ताल –

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मध्यप्रदेश का इंदौर (Indore) एजुकेशन हब बन चुका है। दूर-दराज से बच्चे यहां कई सपने लिए पढ़ने आते हैं और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश लेते हैं। यहां लगभग सभी पाठ्यक्रम की पढ़ाई होती है। मिनी मुंबई (Mini Mumbai) कहलाए जाने वाला इंदौर कोचिंग संस्थानों (Indore Coaching Center Fraud)  के लिए भी फेमस है। शहर में आपको चौराहों पर, रोड के आसपास बड़े-बड़े होर्डिंग्स दिखेंगे, लेकिन ये होर्डिंग्स कपड़ों या गहनों के नहीं बल्कि कोचिंग्स के होते हैं।

यहां लगभग सभी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive examination) की तैयारी कराई जाती है, लेकिन बच्चों के अभिभावकों के मन में फिर भी यहाँ की शिक्षा के लिए कई सवाल उठ रहे हैं। बच्चों के माता-पिता जब ये सवाल लेकर टैलेंटेड इंडिया के पास पहुंचे, तो सवालों को जानने के बाद ‘टैलेंटेड इंडिया’ की टीम पहुंची कई चौराहों पर और गलियों में , जहां-जहां शिक्षण संस्थाएं चलाई जाती है। वहां जाने के बाद दुसरे के मन में उमड़ रहे सवाल अब हमारे मन में थे।

इंदौर में कई बड़े चौराहों के आसपास कोचिंग संस्थांओं का बाज़ार मिल जाएगा। इंदौर की सबसे प्रसिद्ध जगह राजवाड़ा के आसपास जैसे हर चीज का बाजार मिल जाएगा, वैसे ही इंदौर (Indore Coaching Center Fraud ) में भी प्रशासनिक सेवा, प्रतियोगी परीक्षाएं और कई अन्य परीक्षाओं के लिए भी कई चौराहों पर सजे बाजार मिल जाएंगे।

जैसे वेदा कॉम्प्लेक्स में प्रशासनिक सेवाओं के लिए, मधुमिलन चौराहे के पास सिल्वर मॉल में सीए, सीएस के लिए, भंवरकुआं चौराहे पर प्रशासनिक और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गीता भवन के तुलसी टावर में मेडिकल के लिए ऐसे ही कई चौराहों पर कई संस्थान दिख जाएंगे।

एक काम्प्लेक्स में जब हम पहुंचे तो घबरा गए।  वहां एक ही परीक्षा के लिए कई सारी क्लासेस थी।  बड़ी बात तो यह है कि कई क्लासेस मिले जुले नाम से चल रही हैं, जो और सोचने पर मजबूर करती है।  इसके बाद हमें लगा कि अभिभावकों के मन में सवालों का भवंडर उठाना तो लाज़िमी है।  वे बिल्डिंग में जाने के बाद सोचते होंगे आखिर दाखिला कहां कराएं ? कौन सी संस्था ज्यादा अच्छी है, क्योंकि सभी संस्थाओं के सामने टॉपर से बड़े-बड़े फोटो लगे हुए हैं।  सभी अपने आप को सर्वश्रेष्ट बता रहे हैं।

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क्या सुरक्षित है ये शिक्षा का बाजार

एक ही इमारत में कई कोचिंग्स, मतलब बच्चों की भारी भीड़ और ऐसे में सबसे पहले मुद्दा आता है बच्चों की सुरक्षा का। क्या वे सुरक्षा के बदोबश्त करते हैं ? गुजरात में हुए हादसे में कई बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद इंदौर में भी कई संस्थानों का निरिक्षण किया गया और उन्हें चेताया गया कि सुरक्षा के मानकों का पालन करें, लेकिन हाल अभी भी वही है।  जब हम ऐसी इमारतों में पहुंचे तो हमें सुरक्षा के मानकों में कमी दिखी।

क्या एक बच्चे का कई संस्थानों में पढ़ना मुमकिन है ?

कोचिंग संस्थानों के बाहर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग में टॉपर्स के नाम लिखे हुए दिखे, लेकिन जब सभी के होर्डिंग पर नजर गढ़ाई तो पता चला कि कई बच्चों के नाम कई संस्थानों ने लिखे गए।  सभी का दावा है कि टॉपर बच्चे उन्ही की कोचिंग में पढ़कर निकले हैं।  अब ये तो हो नहीं सकता, लेकिन एक और बात भी पता चली कि कई बच्चों ने कोचिंग कहीं और से की, रिवीजन के लिए कहीं और गए और टेस्ट कहीं और का दिया! अब इसके बाद एक और सवाल, क्या बच्चों को कुछ बनाने का सपना मन में लिए अभिभावकों को बच्चों का प्रवेश तीन से चार क्लासेस में करवाना चाहिए ?

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एक ही नाम से चलाई जा रही संस्थाओं के कारण परेशानी

वर्षों से चलाई जा रही कई संस्थानों के नाम से ही कई नई कोचिंग्स भी चलाई जा रही है, जिससे भ्रम की स्थिति और बढ़ जाती है। भवरकुआं चौराहे पर कई क्लास शो रूम जैसी नजर आ रही थी। वहां एक नाम था कौटिल्य एकेडमी, जिसके नाम से ही पास में ही इंदौर कौटिल्य एकेडमी भी चलाई जा रही थी।

दोनों ही संस्थाओं ने हाल ही में अपना 17वां स्थापना दिवस मनाया, लेकिन जो एक बात इंदौर की जनता से पता चली है कि उन्होंने कौटिल्य एकेडमी का नाम पहले से सुना है और इंदौर कौटिल्य एकदम नई है। खैर ये तो सब सवाल हमारे मन में भी उठ गए की बच्चों के भविष्य के साथ कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है।  एक तरफ तो उनका भविष्य बनाने के नाम पर लाखों लेते हैं, लेकिन वहां भी बार्गेनिंग काम आ जाती है।  शिक्षा का ये बाजार तेजी से अपने पैर पसार रहा है।

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