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भारी बारिश के बाद अब किसान दलालों से परेशान

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इंदौर: किसानो की मेहनत के बगैर हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते है क्योकि हमें हर दिन जीवन जीने के लिए अनाज की आवश्यकता है जो केवल किसान के कठोर परिश्रम के बाद मिलता है शायद इसीलिए किसान को अन्नदाता कहा जाता है (Indore Choithram Mandi)।  इन दिनों मध्यप्रदेश में किसानो की हालत अत्यंत दयनीय है क्योंकि भारी बारिश ने किसानो का सबकुछ बर्बाद कर दिया है।  उनकी फसलें पूरी तरह बर्बादी हो गई है और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रो के कच्चे मकान भी भारी मात्रा में क्षतिग्रस्त हुए है। बारिश का सबसे से ज्यादा कहर सिर्फ किसानो पर बरपा है। अब इस स्थिति से उभरने के लिए किसान किसी कदर सब्जी भाजी बेचकर अपना पेट पालने की कोशिश में लगा  है लेकिन उनके इस प्रयाश में भी दलाल बारिश की तरह खलल डाल रहे है। शायद इसी को कहते है गरीबी में आटा गीला होना।

 

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जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी  इंदौर की चोइथराम मंडी में इन दिनों दलालों का तांडव है।  जिसने पहले से परेशान गरीब किसानो की नाक में दम कर रखा है। मंडी में किसानो  और खेरची व्यापारियों को व्यापार करने के लिए किराए पर सड़क मिलती है (Indore Choithram Mandi)। इसके बाद भी उन्हें धंधा करने के लिए रोज लगभग 200 रूपये और 7 प्रतिशत का कमीशन देना पड़ता है दलालों चाहे व्यपारियों का धंधा मंदा हो या अच्छा दलालों को उनके पैसे से मतलब होता है।

किसान इस रोज रोज की उगाही से तंग आ चुके है।  लेकिन उन्हें वहा पर व्यापार करना है इसलिए बेमन के ही सही लेकिन दलालों को पैसे देते है। इस दलाली का खुलासा वसुमित्र संस्था ने अगस्त से सितम्बर महीने के दौरान मंडी में पांच दिनों तक सर्वे करने के बाद किया है।  संस्था ने हाल ही में यह रिपोर्ट एडीएम कैलाश वानखेड़े और नगर निगम कमिश्नर आशीष सिंह को सौंप दी है। संस्था की सचिव ग्रीष्मा त्रिवेदी ने बताया कि मंडी में लगाए गए महिंद्रा वेस्ट प्लांट की स्टडी करने के दौरान यहां के व्यापारियों व किसानों की समस्या सामने आई थीं।

मंत्री जी की जी हुजूरी में खाकी की ‘चरण वंदना’: Video viralसचिव ग्रीष्मा त्रिवेदी के अनुसार मंडी में लगभग सुबह 4 से सुबह 10 बजे तक सड़क व ओटलों पर बैठकर व्यापार करने वाले 50 किसानों व खेरची व्यापारियों से बात की। उसके बाद रिपोर्ट मंडी के भार साधक अधिकारी और एडीएम कैलाश वानखेड़े को सौंपी। उन्होंने मुझे एक बार और मंडी में जाकर किसानों व खेरची व्यापारियों की समस्याओं को जानने के लिए कहा। इस बार जब किसानों व खेरची व्यापारियों से समस्याएं जानी तो पता चला वे प्रतिदिन औसतन 400 रुपए की कमाई कर लेते हैं।

मंडी प्रशासन जो सुविधाएं उन्हें देता है, उससे वे केवल 35 प्रतिशत ही संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि शौचालयों की नियमित सफाई, गंदे पानी के निकासी होना चाहिए। खेरची व्यापारियों के लिए एक अलग से बाजार का निर्माण हो। यहां पर वाहनों की पार्किंग के लिए एक स्थान तय किया जाए। मंडी अफसरों का नियमित दौरा होना चाहिए, ताकि अवैध वसूली जैसी समस्याओं से किसानों को जूझना नहीं पड़े।

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-Mradul tripathi

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