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‘फादर्स डे’ पर बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि, हुईं आंखें नम

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वक्त बदल रहा है और साथ ही बदल रही है समाज की सोच। समाज में आमतौर पर मान्यता है कि बेटा कुल का दीपक होता हैं, बेटे के बिना माता-पिता को मुखाग्नि (fathers day daughter did death rituals) कौन देगा, लेकिन अब ये बातें बीते जमाने की हो गई हैं| यह बात वाटवानी परिवार ने साबित की है|

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जहां एक ओर रविवार को पूरे  देश में ‘फादर्स डे’ (fathers day daughter did death rituals) मनाया जा रहा था वहीं मध्यप्रदेश के इंदौर(indore) शहर में 12 वर्षीय बेटी ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। अंतिम  संस्कार के समय बेटी ने ‘हैप्पी फादर्स डे’ कहा, जिसको सुनने के बाद वहां पर खड़े तमाम  लोगों की आंखें नम हो गई|

दरअसल ,इंदौर के  प्रेम नगर में रहने वाले 38 साल के जय वाटवानी (JAI VATVANI) की  शनिवार रात हार्ट अटैक (heart attack ) से अचानक मौत हो गई । ऐसे में पिता को मुखाग्नि कौन दे, इस पर चर्चा चल रही थी| जय की इकलौती संतान उनकी 12 वर्षीय बेटी है और भारतीय संस्कृति के अनुसार, किसी की भी मौत होने पर मुखाग्नि उसका बेटा ,पति ,भाई या बाप ही दे सकता है या यूं कह लें कि कोई भी पुरुष ही ऐसा कर सकता है,  लेकिन  वाटवानी परिवार ने इस बात को साबित किया की बेटी भी किसी बेटे से कम नहीं है और इस सोच को आगे बढ़ाते हुए पुत्री खुशी ने पिता को मुखाग्नि (fathers day daughter did death rituals) दी|

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जय के निधन के बाद परिजन की सहमति से उनकी पुत्री खुशी ने अपने पिता के अंगों को दान करने की इच्छा जाहिर की। मुस्कान ग्रुप के सेवादारों द्वारा अंगदान की प्रक्रिया प्रारंभ करवाई गई, लेकिन चिकित्सकीय कारणों से मृतक जय की सिर्फ आंखों का ही दान किया जा सका। रीज़नल पार्क(Regional Park ) मुक्तिधाम पर खुशी ने अंतिम संस्कार की सभी रस्मों को पूरा करने के बाद उन्हें मुखाग्नि  (fathers day daughter did death rituals) दी।

बेटियां क्यों नहीं…

आज का  जमाना बदल गया है, पुरानी कुरीतियां रही हैं कि दाह संस्कार का काम केवल बेटे ही कर सकते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है, जमाना बदल रहा है। जो काम बेटे कर सकते हैं, उस काम को बेटियां भी कर सकती हैं। आज लड़कियों  का जमाना है और वे  हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं तो क्यों न वे  माता-पिता को मुखाग्नि (fathers day daughter did death rituals) दें। यह बात देश की कई लड़कियां साबित कर रही हैं कि खुशी के अलावा और भी कई ऐसी लड़कियां  हैं, जिन्होंने  पुरानी कुरीतियों  को बदला है।

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