मशहूर जादूगर आनंद ने साझा किए अनुभव

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जादू दुनिया और भारत की सबसे प्राचीन विधा है| जिस तरह विश्वभर में रशिया का सर्कस प्रसिद्ध है, उसी तरह दुनिया में भारत का जादू भी पसंद किया जाता है| यदि सरकार देश की विलुप्त होती इस विधा को संरक्षित करने के लिए कदम उठाए तो जादूगर करोड़ों रुपए की विदेशी मुद्रा को भारत ला सकते हैं|

ये बातें मशहूर जादूगर आनंद ने सोमवार दोपहर इंदौर प्रेस क्लब में चाय पर चर्चा के दौरान कही| जादूगर आनंद जल्द ही इंदौर में अपना शो करने जा रहे हैं| 4 मई से शुरू होने वाले इस शो से पहले जादूगर आनंद ने पत्रकारों से जादू की विधा को लेकर अपने अनुभव साझा किए|

उन्होंने कहा कि मैं 6 वर्ष की उम्र से ही जादू के प्रति आकर्षित था| इसके लिए हिप्नोटिज्म में उन्होंने अपना गुरु ख्यात धर्मगुरु और विचारक ओशो को माना| बाद में जादूगर आनंद ने ओशो के साथ मिलकर जादूगर आनंद आचार्य परम आनंद के नाम से प्रसिद्ध हुए|

उन्होंने कहा कि जादू के कारण ही आज भारत का नाम देश-विदेश में जाना जाता है| उन्होंने इस विधा को संरक्षित करने के लिए सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा की| उन्होंने कहा कि यदि मध्यप्रदेश की सरकार जादू को लेकर संस्थान खोलने के लिए उन्हें सुविधाएं प्रदान करे तो वे यहां अच्छे जादूगर तैयार कर सकते हैं|

वहीँ उन्होंने विदेशी जादू की तकनीक से भारत की तकनीक को ज्यादा प्रभावी बताया| उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर डाले गए जादू के एपिसोड में प्रायोजित दर्शक के साथ जादू की ट्रिक को दिखाया जाता हैं, जिससे लोग जल्दी प्रभावित होते हैं| वहीँ लाइव शो के दौरान दर्शकों एक अलग रोमांच की अनुभूति होती है|

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