शिक्षित के साथ संस्कारवान भी बनें

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श्री वैष्णव विद्यापीठ  विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने इंदौर पहुंची राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ‘रचनात्मकता’ का उपयोग देश के विकास में होना चाहिए| भारत पूरे विश्व का युवा जनसंख्या वाला सबसे बड़ा देश है|  हमारे देश के युवाओं की शक्ति, सृजनशीलता, क्रियाशीलता, सक्रियता और उनकी ऊर्जा का उपयोग विकास में किया जाना चाहिये। युवाओं की शक्ति एवं ऊर्जा का बेहतर उपयोग कर हम नये भारत का निर्माण कर सकते हैं। महामहिम ने युवाओं से आह्वान किया वो शिक्षित बनने के साथ संस्कारवान भी बनें और समाज सेवा में सक्रिय योगदान दें।

दीक्षान्त समारोह में विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी की चेयरमेन पुरूषोत्तम दास पसारी और उपकुलपति डॉ. उपेन्द्र धर भी मौजूद थे। इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की और समारोह को सम्बोधित करते हुए विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना की और दीक्षान्त समारोह को जीवन का ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि दीक्षान्त समारोह हमारे प्राचीन संस्कृति एवं संस्कार का एक अंग है।

नये पाठ्यक्रम शुरू करने की जरूरत

राज्यपाल ने कहा कि प्रयास किया जा रहा है कि सभी विश्वविद्यालयों को 10-10 विषय, शोध एवं अध्ययन के लिये दिये जायें। समय की माँग के अनुसार विश्वविद्यालयों में नये पाठ्यक्रम शुरू करने की जरूरत है, विश्वविद्यालयों में कौशल विकास केन्द्र खोले जायें और प्लेसमेंट शिविर लगाये जायें। श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय ने 10 क्षय रोगियों को गोद लेकर उन्हें लगातार 6 माह तक पोषण आहार देने और उनके उपचार की मॉनीटरिंग की घोषणा की।

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