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बाकलीवाल को मजबूत बना गया नाथ का बयान

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प्रदेश में लोकसभा की 29 में से महज 3 सीटें कांग्रेस के पास है, लेकिन फिर भी कांग्रेस इस चुनाव में सभी 29 सीटों पर जीत का दावा कर रही है। कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि इस चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के नतीजों में उलटफेर देखने को मिल सकता है यानी भाजपा कम पर सिमट सकती है, जबकि कांग्रेस को अप्रत्याशित सीटें मिल सकती हैं।

ऐसे में चर्चाओं में इंदौर लोकसभा सीट भी है, जिस पर कोई भी उम्मीदवार आज तक जीत दर्ज नहीं कर सका है। इस सीट से उम्मीदवार कौन होगा,यह तो किसी को नहीं पता, लेकिन मुख्यमंत्री सहित पूरे आलाकमान की इच्छा है कि उम्मीदवार ऐसा हो, जो यहां से जीत दर्ज कर सके और कांग्रेस का वनवास खत्म कर सके।

जब बात पार्टी की ओर से टिकट दिए जाने की उठी थी, तब कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ नेता दिग्विजयसिंह ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ एयरपोर्ट पर ही रायशुमारी की थी। इस चर्चा में विनय बाकलीवाल का नाम भी निकलकर सामने आया था। बाकलीवाल ने सिंह के सामने चुनाव लड़ने की हामी भी भरी थी, लेकिन उनके आका कमलनाथ ने ही फोन पर उनके नाम को खारिज कर दिया था।

लाउडस्पीकर मोड पर सिंह ने जब कमलनाथ से चर्चा की थी तो उन्होंने कहा था कि विनय को चुनाव नहीं लड़ाया जा सकता, वह हार जाएगा। इसके बाद सभी कांग्रेसियों में यह चर्चा थी कि शायद कमलनाथ के अंगने में बाकलीवाल की वह जगह नहीं बची, जिसके चर्चे पहले आम थे।

वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक लोगों का मानना है कि बाकलीवाल इंदौर में कमलनाथ के एकमात्र और विश्वसनीय सिपाही हैं। कमलनाथ ने कहा, यदि कांग्रेस संगठन से कोई काम करवाना है तो बाकलीवाल यह काम बखूबी कर सकते हैं। ऐसे  में कमलनाथ ने बाकलीवाल के नाम को मना करके भी उन्हें मजबूती ही प्रदान की है।

कमलनाथ के सामने बाकलीवाल खुद तो दावेदारी कर नहीं सकते थे, सो यह काम दिग्विजयसिंह ने कर दिया। वहीं कमलनाथ ने यह कहा कि जीतने वाला उम्मीदवार चाहिए, जिससे बाकलीवाल की दावेदारी कहीं से भी खारिज नहीं होती। वहीं बाकलीवाल अब लोगों से भी कहते फिर रहे हैं कि यदि पार्टी आदेश देगी तो मैं चुनाव लड़ सकता हूं।

कुल मिलाकर बाकलीवाल, जिनका नाम एक हफ्ते पहले किसी ने दावेदार के रुप में सोचा भी नहीं था, उन्होंने खुद को अचानक प्रबल दावेदारों की सूची में लाकर खड़ा कर लिया है। बाकी फैसला आलाकमान को करना है।

– राहुल

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