VIDEO : सलाखों में कैद विधायक आकाश का भविष्य

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इंदौर में निगर निगम (Indore Municipal Corporation) के ऑफिसर को बल्ले से पीटने वाले भाजपा (BJP ) विधायक आकाश विजयवर्गीय (Akash Vijayvargiya) की मुश्किलें अब और बढ़ सकती है। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) के पुत्र आकाश को सालों की कैद की सज़ा भी हो सकती है।

गुरुवार को इंदौर अपर सत्र न्यायालय ने उनकी याचिका यह कहकर खारिज कर दी कि मंत्री, विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए भोपाल में एक कोर्ट निर्धारित की गई है। कानून के जानकारों का कहना है कि यदि अधिनियम 1951 (Representation of the People Act, 1951 ) के तहत विधायक के खिलाफ जिन धाराओं में केस दर्ज किया है, ट्रायल के दौरान वे साबित हो जाती हैं तो विधायक आने वाले 6 सालों तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

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इंदौर निगम कर्मचारी की रिपोर्ट पर भाजपा विधायक आकश विजयवर्गीय सहित 10 अन्य लोगों पर आईपीसी की धारा 353, 294, 323, 506, 147 और 148 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। आइये जानते हैं इन धारों के अंतर्गत आकाश को कितनी मिल सकती है सज़ा।

आईपीसी की धारा 353 में सज़ा का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 353 (IPC 353 ) उन लोगों पर लगाई जाती है, जो सरकारी कर्मचारी पर हमला कर या उस पर ताकत का इस्तेमाल कर उसे उसकी ड्यूटी निभाने से रोकते हैं। ऐसे मामलों में दोषी को दो साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

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आईपीसी की धारा 294 में सज़ा का प्रावधान

सार्वजनिक जगहों पर अश्लील हरकतें करने या अश्लील गाना गाने पर आईपीसी की धारा 294 लगाई जाती है। इस मामले में आरोप अगर साबित हो जाए तो तीन महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकता है।

आईपीसी की धारा 323 में सज़ा का प्रावधान

स्वेच्छया उपहति कारित करने के लिए दंड- उस दशा के सिवाय जिस के लिए धारा 334 में उपबंध है, जो कोई स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिस की अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 506 में सज़ा का प्रावधान

जो कोई भी आपराधिक धमकी देता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है। यदि धमकी मृत्यु या गंभीर चोट, आदि के लिए है और यदि धमकी मौत या गंभीर चोट पहुंचाने, या आग से किसी संपत्ति का विनाश करने के लिए, या मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए, या सात वर्ष तक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या किसी महिला पर अपवित्रता का आरोप लगाने के लिए हो, तो अपराधी को किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।

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आईपीसी की धारा 147 में सज़ा का प्रावधान

आईपीसी की धारा 147 की शिकायत होने पर पुलिस दंगा करने वालों को गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन ये जमानती होने के कारण आरोपी जमानत ले सकता है। इसमें 2 वर्ष की सजा और जुर्माना लगता है।

आईपीसी की धारा 148 में सज़ा का प्रावधान

धारा 148 दंगो के लिए लगाई जाती है इसमें 2 वर्ष की सजा और जुर्माना लगता है। जमानत भी हो जाती है।

इसका मतलब साफ़ है कि विधायक आकाश विजयवर्गीय पर लगाईं गई धाराओं के अनुसार यदि आरोप साबित हो जाते हैं तो उन्हें अधिकतम सात साल और  कम से कम दो साल की सज़ा हो सकती है। अब देखना ये है कि क्या भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय के खिलाफ आरोप साबित होते हैं या फिर उनके द्वारा बचाव में दिए जा रहे तर्क सही साबित होते हैं।

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