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सही कार्य न करने पर 165 कर्मचारी बर्खास्त, 15 सस्पेंड

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स्वच्छता के मामले में भारत में तीन बार से नंबर 1 रहने वाले इंदौर ने सभी रहवासियों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है | नगर की इस सफलता का श्रेय पूरी तरह से नगर निगम को ही जाता है | अब लगता है कि नगर निगम के पदाधिकारियों (165 Employees Dismissed In Indore Municipal Corporation) ने प्रण कर लिया है कि वे किसी भी मामले में पीछे नहीं रहेंगे और किसी भी कार्य में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी| इसी के मद्देनज़र निगमायुक्त ने कड़ी कार्रवाई की है |

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दरअसल, निगमायुक्त आशीष सिंह ने बड़ी कार्यवाही करते हुए संपत्ति कर वसूली में जॉइनिंग नहीं देने वाले नगर निगम के 165 कर्मचारियों को बर्खास्त किया। साथ ही 15 कर्मचारियों को किया निलंबित किया गया है। इन कर्मचारियों की ड्यूटी राजस्व वसूली कार्य में लगाई गई थी, लेकिन यह अब तक ज्वाइनिंग देने नहीं पहुंचे थे। बताया जाता रहा है इनमें से अधिकांश कर्मचारी विधायक और पार्षदों के करीबी हैं।

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कांग्रेस पार्षद दल और पार्टी नेताओं ने मंगलवार को गृह मंत्री बाला बच्चन से मुलाकात कर मांग की कि नगर निगम की जनसुनवाई (165 Employees Dismissed In Indore Municipal Corporation) पहले की तरह एक ही जगह पर कराने के निर्देश दिए जाएं। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि सरकार और संभागायुक्त के निर्देश के बावजूद निगम अधिकारी जनसुनवाई एक हॉल में नहीं कर रहे हैं।

इससे नागरिकों को समस्याएं हल करवाने में कठिनाई होती है। मंत्री ने कहा कि जनसुनवाई एक ही जगह आयोजित करने के लिए अफसरों को निर्देश दिए जाएंगे। अलीम ने बाणगंगा स्थित सरकारी हॉस्पिटल का नामकरण रामलाल यादव और बिचौली हप्सी से संविद नगर तक रोड का नाम स्व. राधाकिशन मालवीय के नाम पर करने की मांग की।

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मंत्री ने इस संबंध में समुचित कार्रवाई करने का भरोसा दिया। प्रतिनिधिमंडल में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन, कार्यकारी अध्यक्ष विनय बाकलीवाल, विधायक संजय शुक्ला, विशाल पटेल, कांग्रेस पार्षद और अमन बजाज आदि मौजूद थे।

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