कुष्ठ रोगी लड़ सकेंगे नगरीय निकायों के चुनाव

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अब नगरीय निकायों के चुनाव में कुष्ठ रोगी भी चुनाव लड़ सकेंगे। राज्य सरकार ने 1961 में बने नगर पालिका अधिनियम में बदलाव किया है। इस संबंध में राज्य सरकार नगर पालिका अधिनियम में संशोधन करने के लिए जल्द ही अध्यादेश ला सकती है।

कुष्ठ रोगियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने विधि विभाग को नगरीय प्रशासन विभाग से कानून में संशोधन करने की सलाह दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह केंद्र और राज्यों का कर्तव्य है कि वह कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा के समाज से जोड़े।

1961 में बने नगर पालिका अधिनियम में कुष्ठ रोगी को चुनाव लड़ने से वंचित रखा गया है। अब इस प्रावधान को हटाया जाएगा। बता दें कि इससे पहले सामाजिक न्याय विभाग ने कुष्ठ रोगियों को सामान्य मरीजों के साथ अस्पताल में भर्ती करने के आदेश जारी किए हैं। पहले सरकारी अस्पतालों और जेलों में भी कुष्ठ रोगियों को अलग रखा जाता था।

गौरतलब है कि भारत सरकार मेडिकल बोर्ड यह साफ कह चुका है कि कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को अपने कानूनों की जांच कर उसे सुधारने के आदेश दिए हैं। इसी सिलसिले में कानून में संशोधन का कदम उठाया जा रहा है।

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