जैन मुनि तरुणसागर का निधन, जानिए उनके विवादित बयान

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जैन मुनि तरुणसागर महाराज का 51  साल की उम्र में निधन हो गया| वे पिछले 20 दिन से पीलिया से पीड़ित थे और बहुत कमजोर हो गए थे| बीमारी के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन जब दवाइयों का उन पर असर नहीं होने लगा तो वे राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास के लिए चले गए| लोगों का कहना है कि उन्होंने संथारा ले लिया था| उनके निधन की खबर सुनते ही उनके प्रवास स्थल पर उनके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु जुटने लगे हैं| दिल्ली-मेरठ हाईवे पर स्थित तरुणसागरम तीर्थ में आज दोपहर 3 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा|

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी जैन मुनि के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है| उन्होंने ट्वीट किया, “जैन मुनि तरुणसागर के निधन का समाचार सुनकर गहरा दुख पहुंचा| हम उन्हें हमेशा उनके प्रवचनों और समाज के प्रति उनके योगदान के लिए याद करेंगे| मेरी संवेदनाएं जैन समुदाय और उनके अनगिनत शिष्यों के साथ है|”

तरुण सागर महाराज अपने क्रांतिकारी एवं विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में बने रहते थे, उन्हें क्रांतिकारी संत के नाम से भी जाना जाता था| आइये जानते हैं उनके कुछ विवादित बयान|

नहीं तो भारत बन जाएगा दूसरा पाकिस्तान

तरुण सागर महाराज ने लव जिहाद को मुसलमानों की सोची-समझी साजिश बताई थी| उनका कहना था कि प्यार में फंसाकर हिन्दू लड़कियों को मुसलमान बनाया जा रहा है| यदि इसे नहीं रोका गया तो भारत दूसरा पाकिस्तान बन जाएगा| उनके इस बयान के कारण वे आलोचनाओं से घिरे थे|

तीन तलाक पर बयान

जैन मुनि तरुणसागर ने तीन तलाक के मामले पर कहा था कि जो लोग मुस्लिम महिलाओं के कल्याण का दावा कर रहे हैं, वह महज दिखावा है| ऐसे नेताओं या दलों को महिलाओं के हक से कोई लेना-देना नहीं है, वे बस अपनी राजनीति कर रहे हैं|

देश में ही छिपे हैं गद्दार

आतंकवाद पर बयान देते हुए उन्होंने कहा था कि जितने आतंकवादी पाकिस्तान में नहीं हैं, उससे ज्यादा गद्दार हमारे देश में मौजूद हैं इसलिए गद्दारों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आंतरिक आतंकवाद खत्म हो सके|

दुष्कर्मी बाबाओं के पुतले जलाएं, रावण के नहीं

जैन मुनि तरुणसागर महाराज ने दशहरे के मौके पर कहा था कि दुष्कर्मी बाबाओं के पुतले जलाए जाने चाहिए, रावण के नहीं| दशहरा तभी सार्थक होगा, जब हम सब एक साथ मिलकर इन फर्जी बाबों के खिलाफ खड़े हो जाएंगे| सभी का पुतला बनाकर दशहरे पर दहन करना चाहिए, जिससे समाज में एक संदेश जा सके|

 

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