जानिए, कौन हैं आईएएस लोकेश जाटव

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लगातार तीन दिनों से चल रही अटकलों के बीच अब इंदौर जिले को नए कलेक्टर (Indore New Collector Lokesh Jatav) मिल गए हैं। पूर्व कलेक्टर निशांत वरवड़े का तबादला किए जाने के बाद कई अधिकारियों के नाम इंदौर कलेक्टर के लिए चल रहे थे, लेकिन उन पर सहमति नहीं आई थी। गुरुवार शाम को सामान्य प्रशासन विभाग ने इंदौर कलेक्टर के लिए आईएएस लोकेश जाटव के नाम का आदेश जारी कर दिया।

2004 बैच के आईएएस और वर्तमान में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर भोपाल में पदस्थ लोकेश जाटव अब इंदौर (Indore New Collector Lokesh Jatav) की जिम्मेदारी संभालेंगे।

इससे पहले 25 दिसंबर आधी रात को जारी हुई ट्रांसफर सूची में पहले इंदौर कलेक्टर का नाम नहीं था, लेकिन बाद में उनका तबादला एनआरएचएम में डायरेक्टर के पद पर हो गया।

जाटव के करियर पर एक नज़र (Indore New Collector Lokesh Jatav)

– महज़ 14 साल की नौकरी में जाटव डिंडोरी (मात्र सात दिन), राजगढ़, नीमच, मंडला और रायसेन कलेक्टर रह चुके हैं, इंदौर उनका छठा जिला है।

– जाटव का नाम  24 दिसंबर को तय हो गया था, लेकिन वे निर्वाचन आयोग के अधिक थे इसलिए सरकार को लिखित मंजूरी का इंतज़ार था। 26 को आयोग से पत्राचार किया गया और मंजूरी आते ही आदेश जारी कर दिए।

– जाटव को जेंटलमैन और होशियार अधिकारी के रूप में जाना जाता है। सरकारी कामकाज में तकनीक का उपयोग करने में वे माहिर हैं।

– जाटव को ई-गवर्नेंस अवॉर्ड भी मिल चुका है। उन्होंने कृषि क्षेत्र के साथ स्कूली शिक्षा क्षेत्र में काफी काम किए हैं।

– उनकी नियुक्ति को राजनीति से परे जाकर मेरिट के आधार पर चुना जाना बताया जा रहा है।

– मंडला में ज्ञानापर्जन कार्यक्रम के तहत उन्होंने 10वीं व 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए विशेष सॉफ्टवेयर बनवाया, जिसके बाद जिले से 17 बच्चे आईआईटी में चयनित हुए थे।

अब तक रहे ग्रामीण के कलेक्टर

जाटव हमेशा ग्रामीण परिवेश वाले जिले में कलेक्टर रहे। वे इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर निगम में भी पद पर नहीं रहे। ऐसे में इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट, स्मार्ट सिटी के साथ काम करने के साथ ही यहां चल रहे अन्य बड़े प्रोजेक्ट को संभालना और काम को आगे बढ़ाना उनके लिए बड़ी चुनौती रहेगी।

इंदौर की तासीर के मुताबिक करुंगा काम-जाटव

इंदौर जैसे बड़े जिले की कमान संभालने वाले कलेक्टर लोकेश जाटव ने कहा कि शासन की योजनाओं को जनता तक बेहतर ढंग से पहुंचाना ही प्रशासन का पहला दायित्व होता है। यदि इंदौर जैसे जिले की कमान मुझे मिली है तो इसके लिए समाज की अंतिम पंक्ति तक योजनाओं को पहुंचाना ही मेरी प्राथमिकता होगी। वहीं डिंडौरी जिले की कलेक्टरी से महज 7 दिनों में हट जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला शासन का था, इसका कारण भी मुझे नहीं पता। अब नए ज़िले में नए अभियान के साथ काम में जुटूंगा।

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