कान्ह नदी की बदबू से बेहोश हुए कोडवानी

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कान्ह नदी को बचाने के लिए इंदौर में जल सत्याग्रह कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी बुधवार दोपहर अचानक बेहोश हो गए। किशोर कोडवानी कान्ह नदी की सफाई के मामले में प्रशासन से नाराज़ होकर जल सत्याग्रह कर रहे थे, लेकिन 18 घंटे से अधिक समय होने के बाद भी उनसे शहर का कोई जिम्मेदार नहीं मिला।

एनजीटी के निर्देशों के बाद भी कान्ह नदी की सफाई को लेकर प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाए जाने को लेकर कोडवानी ने किशनपुरा स्थित कान्ह नदी पर अपना आंदोलन शुरू किया था। कोडवानी मंगलवार शाम से नदी के गंदे पानी में अपने पैर डुबोकर सत्याग्रह कर रहे थे।

निगम के इंजिनियर ने बुधवार को उनसे मुलाकात कर सत्याग्रह खत्म करने की मांग की थी, लेकिन कोडवानी नहीं माने थे। इसके बाद दोपहर में अचानक कोडवानी की तबीयत बिगड़ी और वे बेहोश हो गए। कोडवानी को उनके साथी और निगम के अधिकारी अस्पताल लेकर गए।

इंदौर की कान्ह नदी की सफाई को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी प्रशासन को तत्काल प्लान बनाकर काम शुरू करने के आदेश दे चुका है, लेकिन बावजूद इसके प्रशासन द्वारा इस ओर कोई कदम नहीं उठाया गया। नगर निगम ने भी अपने बजट में कान्ह नदी की सफाई को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था, लेकिन निगम ने इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए। नदी की सफाई के लिए जनसहयोग से भी कोडवानी ने 35 लाख रुपए इकट्ठा किए थे, लेकिन नदी की सफाई आज तक नहीं हो सकी।

इंदौर की धरोहरों को बचाने के लिए कोडवानी कई बार सत्याग्रह का रुख अख्तियार कर चुके हैं। इससे पहले पीपल्याहाना में बनने वाली कोर्ट की बिल्डिंग के समय भी तालाब बचाने के लिए बारिश में कोडवानी ने सत्याग्रह किया था।

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