मप्र में अनाज खरीदी और शिवराज के दावे का सच

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पिछले पांच सालों की तरह इस साल भी मध्यप्रदेश में गेहू की बम्पर पैदावार हुई. किसान के चेहरे पर मुस्कान थी. लेकिन कोरोना के चलते किसान अपनी उपज को समय पर बाजार नहीं ला सका. सरकार गिरी और फिर नई  सरकार आई ऐसे में किसान से गेहूं के उपार्जन में देरी हुई. कोरोना के चलते आनन्-फानन में जुगाड़ किये गए और अनाज की खरीदी शुरू हुई. लेकिन यहाँ भी किसान को कम परेशानियाँ नही है. कई दिनों तक लाइन में लगना और अधिकारीयों की हाथाजोडी के बाद भी कई जगह माल की तुलाई नही हो रही है. देवास के एक किसान की पांच दिनों तक लाइन में लगने के बाद मौत का समाचार अभी ज्यादा पुराना नहीं है.

इन सब के बाद भी किसान के लिए उपार्जन केन्द्रों पर सुविधाएँ न के बराबर है. ऊपर से माल गोदाम भर जाने के कारण तुलाई रोक दी जाती है. आलम यह है कि जिस किसान को 9 मई को गेहूं तोलना था वह 17 मई को भी लाइन में लगा हुआ माल गोदामों के खाली होने का रास्ता देख रहा है.  बारदान का न होना एक नई समस्या है. परिवहन के समुचित और पर्याप्त साधन न होने से तुला हुआ माल भी खुले में पड़ा है जिस पर बारिश की एक बौछार पड़ने से कितना नुकसान होगा इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. कई जगहों से खुले में रखे गेहूं पर पानी गिरने और अनाज के सड़ने की तस्वीरें आने के बाद भी शिवराज सरकार के कान पर जूं तक नही रेंगी है. ऐसे में यदि किसान से माल ले भी लिया तो सड़ता हुआ अनाज की भरपाई में जनता को ज्यादा दाम चूका कर ही करनी है.

मप्र की कई तहसीलों के उपार्जन केन्द्रों से से किसानों की शिकायतों का पुलिंदा सरकार तक पहुँच चूका है लेकिन शिवराज सरकार फिलहाल भोपाल में कार्यकर्ता सम्मान और मिलन समारोह में मशगुल है . कोरोना के चलते सामाजिक दुरी की दुहाई देने वाले पीएम मोदी के चहेते शिवराज इन दिनों अपने लोगो से गले मिलकर ताजपोशी की बधाइयाँ ले और दे रहे है साथ ही पीएम मोदी के आदेशो की धज्जियां भी उड़ा रहे है. बेफिक्र सरकार इसलिए सुस्त है क्योकि वह जानती है इन सब की भरपाई करने वाले दो ही लोग है. पहला किसान जो हमेशा से पिसता आया है और देश को पालता आया है, दूसरी आम जनता जो किसी भी कीमत पर पेट की भूख के लिए यही अनाज सरकार से ऊँचे दामों पर खरीद ही लेगी. कुल मिलाकर किसान की मेहनत और जनता की भूख के पर्याय मतलब अनाज के सड़ांध मारने से किसी को कोई फर्क नही पड़ता ….हां लेकिन यह तय है कि इस साल का कृषि कर्मण अवार्ड लेते समय शिवराज के भाषण में किसान को महान और चुनाव के समय जनता को भगवान् जरुर कहा जायेगा ….

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