केरल : थमी बारिश, लेकिन लाखों बेघरों की बढ़ी मुश्किलें

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केरल में भारी बारिश और बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है| बाढ़ का कहर भले ही कम हो गया हो, लेकिन लगभग 10 लाख बेघरों को दोबारा बसाना राज्य के सामने नई चुनौती बन गई है| देश के कोने-कोने से आपदा पीड़ितों के लिए सहायता भेजी जा रही है| आर्थिक मदद से लेकर खाद्य सामग्री, ज़रूरत का सामान आदि भी केरल में पहुंचाया जा रहा है, लेकिन वहां लाखों घर जलमग्न हो चुके हैं या पानी के तेज बहाव के साथ बह गए हैं| ऐसे में उन्हें फिर से स्थापित करने में समय लग सकता है|

केरल में कई लोग संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं| राज्य सरकार ने विनाशकारी बाढ़  को ‘गंभीर प्रकृति की आपदा’ घोषित कर दिया है| लाखों लोगों के पुनर्वास और उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए सरकार ने कार्य शुरू कर दिए हैं| भारी बारिश और बाढ़ से राज्य में 370 से अधिक लोगों की जान जा चुकी हैं, वहीं कई लोग अभी भी लापता हैं|

रेल मार्ग शुरू

भारी बारिश और बाढ़ के कारण यातायात बाधित हो गया था, रेल और हवाई सेवाओं भी ठप हो गई थी| अब रेल और हवाई सेवा को पुन: शुरू कर दिया गया है| नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारी ने आपदा के बारे में कहा, “केरल में आई बाढ़ और भूस्खलन की प्रबलता को देखते हुए यह सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए गंभीर प्रकृति की एक आपदा है|” दरअसल, इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा इसीलिए घोषित नहीं किया जा रहा है क्योंकि ऐसा करने से केंद्र को अधिक वित्तीय और अन्य देनी पड़ेगी| वहीं मौत के सरकारी के आंकड़े भी कम बताए गए हैं, क्योंकि अधिक मुआवजा का भुगतान न करना पड़े|

वहीं मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा, “हमारी भी यही मांग है, लेकिन केंद्र ने ऐसी घोषणा करने में कुछ तकनीकी दिक्कतों का हवाला दिया है| अब हमें कुल नुकसान का आकलन करने और केंद्र से इसके बराबर मदद मांगने की ज़रूरत है| ” वहीं सरकार उन मछुआरों को सम्मानित करेगी, जिन्होंने बचाव अभियान में भाग लिया और कई लोगों की जान बचाई|

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