नाथ सरकार के निशाने पर जनअभियान परिषद

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कमलनाथ सरकार जल्द ही जनअभियान परिषद पर कोई कठोर निर्णय लेने वाली है। विधानसभा चुनाव में जन अभियान परिषद (जाप) ने भाजपा की मदद की थी( The (JAP) had helped the BJP)। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘जाप’ को भंग करने की कानूनी सलाह ली जा रही है। आरोप है कि चुनाव में ‘जाप’ ने भाजपा के लिए कार्य किया था।

जनअभियान परिषद का पंजीयन मप्र सोसायटी पंजीयन अधिनियम 1973 के अंतर्गत 4-7-1997 को पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह ने किया था। यह संस्था 2001 तक गुमनाम रही। 2001 में इस संस्था को आरएसएस कार्यकर्ता और भाजपा नेता अनिल माधव दवे ने शुरू किया। आज इस संस्था की बड़ी टीम है( The (JAP) had helped the BJP)।

इस संस्था में सात लाख पैड कार्यकर्ता कार्य कर रहे हैं। इस संस्था ने सरकार की योजनाओं और जनता के बीच सेतु की तरह काम किया है। इस संस्था के अधिकारियों को कलेक्टर ऑफिस और पंचायत भवन में एक कमरा दिया है।

इस संस्था का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है वहीं कार्यकारिणी में कई मंत्री शामिल किए गए थे। इनके अलावा कुछ नौकरशाह भी इस संस्था की कार्यकारिणी में शामिल थे, जिनके प्रमुख सचिव हैं। यह संस्था योजना, आर्थिक और सांख्यिकी विभाग के अंतर्गत आती है।

दो नवंबर को पन्ना जिला कलेक्टर ने राज्य निर्वाचन अधिकारी को लिखा था कि परिषद का जिला समन्वयक सुरेश वरमन, पुलिस द्वारा आचार संहिता के दौरान भाजपा के लिए प्रचार सामग्री के साथ पकड़ा था। कलेक्टर ने इसको आचार संहिता का उल्लंघन बताया था( The (JAP) had helped the BJP)। गौरतलब है कि 6 अक्टूबर को प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई थी। पन्ना एसपी ने इस मामले में चुनाव आयुक्त को लिखा था कि जब वरमन से पूछा गया कि वह क्या काम करता है तो उसने जवाब में कहा था कि वह एक एनजीओ चलाता है।

कमलनाथ ने खुलेआम सरकारी अफसरों को दी धमकी

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