प्रदेशभर के जूडा डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा

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मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है। गांधी मेडिकल कॉलेज और रीवा के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज सहित पांच मेडिकल कॉलेज के करीब 500 जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। ये सभी डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने और मशीनों की मांग को लेकर हड़ताल पर थे।

बीते चार दिनों से प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर्स और पैरा मेडिकल स्टाफ हड़ताल पर है। ये लोग स्टाइपेंड बढ़ाने और मशीनों की मांग को लेकर हड़ताल पर थे। सोमवार को एसीएस राधेश्याम जुलानिया के साथ दोनों पक्षों की बातचीत हुई थी, जो असफल रही। उसके बाद सरकार ने हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टर्स पर एस्मा लगा दिया था।

एस्मा लगते ही जूडा डॉक्टर्स ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया और हॉस्टल खाली करना शुरू कर दिया। हड़ताल के कारण मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प पड़ गयी हैं। मरीज़ परेशान हो रहे हैं।

क्या है एस्मा ?

आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है। ये कानून लागू होने से पहले इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी समाचार पत्र या अन्य दूसरे माध्यम से सूचित किया जाता है। एस्मा अधिकतम छह महीनों के लिए लगाया जा सकता है और इसके लागू होने के बाद अगर कोई कर्मचारी हड़ताल पर जाता हो तो वह अवैध और दण्डनीय है।

क्यों लगता है एस्मा ?

सरकार एस्मा लगाने का फैसला इसलिए करती हैं क्योंकि हड़ताल की वजह से लोगों के लिए आवश्यक सेवाओं का बुरा असर पड़ने की आशंका होती है। इसके तहत जिस सेवा पर एस्मा लगाया जाता है, उससे संबंधित कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते, वर्ना हड़तालियों को छह माह तक की कैद या ढाई हजार रुपए दंड अथवा दोनों हो सकते हैं।

1968 में लागू

एस्मा एक केंद्रीय कानून है, जिसे 1968 में लागू किया गया था, लेकिन राज्य सरकारें इस कानून को लागू करने के लिए स्वतंत्र हैं। बता दें कि कई राज्य सरकारों ने थोड़े बहुत परिवर्तन कर स्वंय का एस्मा कानून भी बना लिया है।

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