ईरान न्यूक्लियर डील से अलग होने को तैयार – खामेनेई

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अमरीका ने मई में ईरान न्यूक्लियर डील से अलग होने का ऐलान किया था। जिसके बाद से ईरान आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इसके बाद अब ईरान ने पहली बार इस डील से अलग होने की इच्छा जताई है। ईरान ने 2015 में हुई न्यूक्लियर डील को छोड़ने की बात कही है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई ने कहा है कि यदि न्यूक्लियर डील देश के हित में नहीं है तो इसे छोड़ने पर विचार करना चाहिए।

खामेनेई ने कहा कि यदि हम इस नतीजे पर पहुंचे कि यह डील हमारे देश के हित में नहीं है तो हमें इससे अलग हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें यूरोप से बातचीत जारी रखना चाहिए, जो 2015 में हुई डील को बचाने की कोशिश कर रहा है। खामेनेई ने आगे कहा कि ईरान सरकार को अपनी इकोनॉमी और न्यूक्लियर डील के लिए यूरोपीय देशों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए।

उन्होंने कहा, अमरीका राष्ट्रपति ट्रंप के बिना शर्त बातचीत के प्रस्ताव के बावजूद ईरान को किसी भी तरह के वार्तालाप में शामिल नहीं होना चाहिए। खामेनेई ने कहा कि अमरीका कहता है कि वे किसी को भी बातचीत के लिए टेबल पर बिठा सकता है। मैं पहले ही कह चुका हूं उनके साथ कोई बातचीत नहीं होगी।

जानें क्या है ईरान-अमेरीका का परमाणु समझौता

वर्ष जुलाई 2015 में अमरीका, ब्रिटेन, रूस, चीन, फ्रांस और जर्मनी के साथ मिलकर ईरान ने परमाणु समझौता किया था। काफी लंबे वक्त के कूटनीतिक पहल के बाद ईरान के परणामु कार्यक्रम को सीमित करने वाले इस परमाणु समझौते पर बात बनी थी। जुलाई 2015 में ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों एनं जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के बीच वियना में ईरान परमाणु समझौता हुआ था। समझौते के मुताबिक ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना था और परमाणु संयंत्रों को निगरानी के लिए खोलना था।

इसके बदले ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में छूट दी गई थी। इस समझौते के तहत ईरान को अपने उच्च संवर्धिक यूरेनियम भंडार का 98 प्रतिशत हिस्सा नष्ट करना था और उसे अपने मौजूदा परमाणु सेंट्रीफ्यूज में से दो तिहाई को हटाना भी था। इस समझौते के अनुसार ईरान पर हथियार खरीदने के लिए लगाया गया प्रतिबंध पांच साल के लिए जारी रहता,वहीं मिसाइल प्रतिबंध आठ साल तक रहेगा। इसके बदले में ईरान को तेल और गैस के कारोबार, वित्तीय लेन-देन, विमान और जहाज के क्षेत्रों में लागू प्रतिबंधों में ढील दी जानी थी।

बाद में अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को खारिज कर दिया था। वहीं यूरोप के देश ईरान का साथ इस लिए दे रहे हैं क्योंकि परमाणु डील के बाद इन देशों ने ईरान में काफी निवेश किया है।

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