सरकारी हलकों में कानाफूसी, वक्त है बदलाव का…

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प्रदेश में कमलनाथ की सरकार बनने के साथ ही कमलनाथ लहर इंदौर में भी पहुंच चुकी है। यहां अब सरकारी दफ्तरों में काम पूरी तरह से ठप है और अधिकारियों को भी यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिरकार भोपाल से आने वाला अगला आदेश क्या होगा।

इंदौर की भाषा में यदि कहा जाए तो यहां के अधिकारियों को सूझ- संपट नहीं पड़ रही है। बहरहाल, इंदौर के सरकारी महकमे में इन दिनों नई सरकार का डर तो व्याप्त हो ही गया है। अधिकारी इस डर के साथ ही अपने दफ्तर पहुंच रहे हैं कि न जाने कब सीएम हाउस से कोई संदेश या फिर भोपाल में बैठक के लिए बुलावा आ जाए।

फिलहाल जो भी अधिकारी ऑफिस पहुंच रहे हैं, वे सिर्फ अपने विभागों की लंबित फाइलों को निपटा रहे हैं ताकि शिकायतों की संख्या कम से कम हो सके। वहीं इंदौर कलेक्टर कार्यालय और नगर निगम में फिलहाल कुछ इस तरह की सुस्ती है, जैसे कोई अवकाश का माह चल रहा हो।

इस मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई भी इसलिए शुरू नहीं हो पाई क्योंकि भोपाल सचिवालय से कलेक्टर कार्यालय को जनसुनवाई के लिए निर्देश नहीं मिला। वहीं नगर निगम में भी कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला। यहां नगर निगम के अफसर और निगम परिषद के सदस्य भी असमंजस में नज़र आ रहे हैं।

ऐसे में इंदौर के सरकारी हलकों में बने समीकरण साफ कह रहे हैं कि अफसरों को अभी से अपनी विदाई के सपने नज़र आने लगे हैं। अफसरों का मानना है कि प्रदेश की नई सरकार में उन्हें या तो अपना ढर्रा बदलना पड़ सकता है या फिर अपना मुख्यालय। अब देखना होगा कि जल्द ही यदि मुख्यमंत्री कमलनाथ इंदौर सहित प्रदेश के अन्य जिलों के अफसरों से रूबरू होते हैं तो उनके तेवर इन अफसरों को लेकर कैसे होते हैं…?

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