अब इंदौरियों की यादों में रहेगा रीगल टॉकीज, अस्तित्व समाप्त 

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शहर का सबसे पुराना सिनेमाघर रीगल पिछले कई वर्षों से लोगों को सिनेमा दिखा रहा है| इस सिनेमा से इंदौरियों की कई यादें जुड़ी हैं| आज यानी 12 सितंबर से इसका अस्तित्व समाप्त हो गया| रीगल टॉकीज़ की लीज़ 11 सितंबर 2018 तक की थी और नगर निगम इंदौर ने लीज का नवीनीकरण नहीं करने का निर्णय लिया है| निगम ने टॉकीज प्रबंधन के आवेदन को कुछ दिन पहले निरस्त कर दिया है| अब नगर निगम यहां पर मेट्रो का स्टेशन, वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर या कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रहा है| 

रीगल टॉकीज़ का इतिहास 

वर्ष 1917 में इंदौर के नंदलालपुरा क्षेत्र में ओपन एयर टॉकीज़ की स्थापना हुई थी| होलकर महाराज फिल्म देखने के शौकीन थे और लंदन में अक्सर फिल्में देखते थे| उन्होंने ही वर्ष 1930 में रीगल टॉकीज़ के लिए ठकुरिया परिवार को जमीन दी और 1934 में रीगल टॉकीज़ की विधिवत शुरुआत हुई| महाराजा खुद अपने परिवार के साथ रीगल टॉकीज़ पर फिल्में देखने आते थे| देखते-देखते यह क्षेत्र रीगल चौराहा के नाम से जाना जाने लगा|

इसके बाद होलकर महाराज ने अपने अभिन्न मित्र बड़ौदा के महाराज गायकवाड़ को इंदौर के रेलवे स्टेशन के सामने सिनेमा हॉल बनाने के लिए जगह दी| वहां गायकववाड़ महाराज ने यशवंत टॉकीज़ और बैंबिनो टॉकीज़ बनाया, जो पहले ही बंद हो चुके हैं|

ठकुरिया परिवार का रीगल टॉकीज के अलावा इंदौर में एक और एलोरा टॉकीज के नाम से सियागंज क्षेत्र में था, जो कुछ वर्ष पहले बंद हो गया और वहां पर अभी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन गई है| रीगल टॉकीज़ की बेशकीमती जमीन अभी करीब 100 करोड़ रुपए की है|

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