ज़्यादातर क़ैदी रिहा होते ही गांव हुए रवाना

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इंदौर की सेंट्रल जेल से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अनेक कैदी उनके अच्छे चाल-चलन और व्यवहार के आधार पर रिहा किए गए | इन बंदियों में ज्यादातर कैदी अपनी रिहाई के साथ ही अपने – अपने परिजन के साथ अपने गांव रवाना हो गए तो कुछ कैदियों ने काम की इच्छा जाहिर की| इस कड़ी में दो कैदियों ने कारपेंटर का काम करने की मंशा जाहिर की तो एक कैदी ने नौकरी करने की बात कही|

मिल गई नौकरी

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जिस कैदी ने नौकरी करने की इच्छा जाहिर की थी, उस एक कैदी को रिहा होते ही नौकरी मिल गई| रिहा हुए कैदी का नाम प्रेम पिता मांगीलाल निवासी मूसाखेड़ी है| प्रेम को कृष्णा मिश्रा नामक  आध्यात्मिक हीलर ने अपने यहां ड्राइवर की नौकरी पर रख लिया है | प्रेम को 6000 रुपए प्रतिमाह वेतन मिल सकेगा|

9 साल से कैदियों से मिलाने का सिलसिला

पंडित मिश्रा पिछले नौ साल से केंद्रीय जेल में रिहा होने वाले कैदियों से मिल रहे हैं | इन कैदियों को वे समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए मार्गदर्शन देते हैं। इस बार स्वतंत्रता दिवस पर रिहा होने वाले  कैदियों से उन्होंने जेल में जाकर बातचीत की थी, जिनमें से ज्यादातर ने कहा कि वे अपने गांव जाना चाहते हैं। दो कैदियों में से एक ने कारपेंटर का काम करने की इच्छा जाहिर की, वहीं दूसरे ने ड्राइवरी करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद  पं. मिश्रा  ने आजादी के दिन रिहा होते ही 9 साल जेल में रहे प्रेम की इच्छा पूरी कर दी।

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