इंडोनेशिया में सुनामी की तबाही

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इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने के बाद आई भयंकर सुनामी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 300 पार गई है। हजारों सैनिक और बचावकर्मी सोमवार को मलबे में तब्दील समुद्र तटों पर पीड़ितों की तलाश में जुटे रहे।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पूर्वो नुग्रोहो ने बताया कि आपदा में मरने वालों की संख्या 370 तक पहुंच गई है। 128 लोग लापता हैं और कई लोग घायल हुए हैं। लापता लोगों की भारी संख्या को देखते हुए मृतकों की संख्या में और इज़ाफा होने की आशंका है।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने सोमवार को इलाके का दौरा किया। सुनामी से सबसे ज्यादा प्रभावित बांतेन क्षेत्र के इंडोनेशियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा कि डॉक्टरों और मेडिकल सप्लाई को प्रभावित इलाकों में भेजा गया है। एसोसिएशन ने कहा, मृतकों में ज्यादातर घरेलू पर्यटक शामिल हैं, जो बीचों पर घूमने गए हुए थे। मौसम एजेंसी के मुताबिक, अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने के बाद समुद्र के नीचे मची तेज़ हलचल सुनामी की वजह हो सकती है।

इससे पहले बीते सितंबर में इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप स्थित पालु और दोंगला शहर में भूकंप के बाद सुनामी आने से 832 लोगों की मौत हो गई थी। कुल 6 लाख की आबादी वाले इन दोनों शहरों में आपदा के तीन महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। 2004 में इंडोनेशिया के सुमात्रा में 9.3 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके बाद हिंद महासागर के तटीय इलाकों वाले देश सुनामी की चपेट में आ गए थे, तब भारत समेत 14 देश सुनामी से प्रभावित हुए थे। गौरतलब है कि ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित होने के चलते इंडोनेशिया में सबसे अधिक भूकंप और सुनामी आते हैं।

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