एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत को मिला ब्रिटेन का साथ

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न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (NSG) में ब्रिटेन भारत की सदस्यता के लिए बिना किसी शर्त समर्थन करने को तैयार है। ब्रिटेन ने कहा कि भारत ने न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में शामिल होने के लिए खुद की योग्यताओं को साबित किया है। भारत इस जिम्मेदारी को उठाने में सक्षम है। ब्रिटेन भारत को एक जिम्मेदार देश मानता है।

चीन ने भारत की सदस्यता का विरोध किया है। भारत इस विरोध के बाद भी नए सिरे ने एनएसजी में अपनी एंट्री को लेकर प्रयास कर रहा है। पिछले महीने अमरीका के साथ टू+टू वार्ता और अमरीका द्वारा भारत को टियर-1 देशों में शामिल किए जाने के बाद भारत यह मानकर चल रहा है कि अमरीका न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में उसका साथ देगा।

ब्रिटेन ने कहा कि भारत के पास एनएसजी का सदस्य होने के लिए सभी योग्यताएं हैं। भारत को इस ग्रुप का सदस्य होना चाहिए। अब यह चीन ही बताए कि उसे भारत की सदस्यता से क्या आपत्ति है। प्रसार और सुरक्षा के मामलों पर भारत ने भी पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के संबंधों पर सवाल उठाए, जिस पर ब्रिटेन की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान के वर्तमान व्यवहार और परिस्थितियों को लेकर चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया और ईरान के मुद्दों पर भारत और ब्रिटेन के विचार एक जैसे हैं। ब्रिटेन ने भारत के उस फैसले पर हैरानी जताई है, जब भारत ने ब्रिटेन के प्रस्ताव का विरोध किया था। बता दें कि यह प्रस्ताव केमिकल हथियारों के इस्तेमाल से खतरों के विषय पर था, जिस पर भारत ने इसके विरोध में वोट किया था।

भारत के लिए क्यों ज़रूरी

ऊर्जा की मांग पूरी करने के लिए भारत का एनएसजी में प्रवेश ज़रूरी है। न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप की सदस्यता मिलने से भारत को परमाणु तकनीक मिलेगी। वहीं भारत को यूरेनियम बिना किसी विशेष समझौते के मिलेगा। साथ ही परमाणु तकनीक और कच्चा माल ट्रांसफर करने में भी मदद मिलेगी।

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