सार्क सम्मेलन में भारत ने किया पाकिस्तान को नज़रअंदाज

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पाकिस्तान की नापाक हरकतों के कारण भारत से उसके रिश्तों में दरार बढ़ती जा रही है। इसका असर संयुक्त राष्ट्र में सार्क देशों के विदेशमंत्रियों की बैठक में भी देखने को मिला। वेस्टिन होटल में हुई बैठक में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी मौजूद थे। सुषमा स्वराज पाकिस्तान के विदेश मंत्री का भाषण सुने बिना ही वहां से चली गईं।

सार्क बैठक में सुषमा स्वराज और पाकिस्तान विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी दोनों के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई। बैठक में सुषमा स्वराज ने अपना वक्तव्य दिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के भाषण से पहले अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गईं। सुषमा स्वराज के जाने से महमूद कुरैशी नाराज़ दिखे। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय सहयोग की बात कही, लेकिन क्षेत्रीय सहयोग कैसे संभव होगा, जब हर कोई बैठकर एक-दूसरे की बात सुनने को तैयार न हो। कुरैशी ने कहा कि शायद उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, इसलिए वे हमारी बात सुने बिना चली गईं।

सार्क बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ज़ोरदार भाषण दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के आर्थिक विकास, सुरक्षा और समृद्धि के लिए शांति का माहौल ज़रूरी है। आतंकवाद विश्व के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बिना किसी भेदभाव के आतंकवाद का हर स्तर पर विनाश करना होगा। साथ ही इसको पनाह देने वाली ताकतों को भी खत्म करना होगा।

सुषमा स्वराज ने कहा कि हमारे क्षेत्र और विश्वभर में शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद इकलौता सबसे बड़ा खतरा है। यह आवश्यक है कि हम आतंकवाद के हर स्वरूप को खत्म करने पर काम करना होगा।

क्या है सार्क ?

सार्क की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को हुई थी, जिसका मुख्यालय काठमांडू में है। सार्क के सदस्य भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान हैं। 1970 में बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर्रहमान ने दक्षिण एशियाई देशों के एक व्यापार गुट के सृजन का प्रस्ताव दिया था। मई 1980 में दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग का विचार फिर रखा गया। इस संगठन के देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बार बैठक अगस्त 1983 में दिल्ली में हुई थी। हर साल 8 दिसम्बर को सार्क दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2007 से पहले सार्क के सात सदस्य थे। अप्रैल 2007 में संघ के 14वें शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान इसका आठवां सदस्य बन गया।

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