कमलनाथ सरकार से नाराज़ निर्दलीय विधायक

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मध्यप्रदेश की सत्ता से दूर रहने वाली कांग्रेस जब 15 सालों का वनवास ख़त्म कर सत्ता में वापस आई, तब उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। कांग्रेस पार्टी को इतनी ख़ुशी हुई कि मुख्यमंत्री चुनने में उसे तीन से चार दिन लग गए। उसके बाद हुआ शपथ ग्रहण समारोह। शपथ ग्रहण समारोह में ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कर्जमाफी का वादा पूरा किया तो सभी को लगा कि अब उनके सपने साकार होने वाले हैं, लेकिन कांग्रेस की मुश्किलें हैं कि कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जीत के बाद कांग्रेस को मुख्यमंत्री चुनने में काफी मशक्कत करनी पड़ी तो अब मुख्यमंत्री चुनने के बाद विभागों के बंटवारे को लेकर संशय है।

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अभी तक विभागों का बंटवारा नहीं किए जाने की वजह से विपक्ष ने कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ विधायकों को मंत्री का पद न मिलने से वे भी भड़क उठे हैं। बुरहानपुर विधानसभा सीट से जीतने वाले निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्रसिंह ने कमलनाथ सरकार को अल्टीमेटम थमा दिया है। निर्दलीय सीट से जीत हासिल करने वाले ठाकुर सुरेंद्रसिंह मंत्री बनने की आस लिए भोपाल में लगातार डटे हुए थे।

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जब ठाकुर सुरेंद्रसिंह को मंत्री पद नहीं मिला तो वे नाराज़ हो गए और मायूस होकर बुरहानपुर लौटे। बुरहानपुर लौटने के बाद उन्होंने जनता का आभार भी व्यक्त किया। साथ ही नाराज सुरेंद्रसिंह ने दावा किया कि कांग्रेस बिना निर्दलीय विधायकों के सरकार नहीं चला सकती। सुरेंद्र सिंह ने कहा कि कमलनाथ सरकार को जल्द ही निर्दलीय विधायकों को मंत्री पद देना पड़ेगा।

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