पहचान छिपाकर कलेक्टर ने सिर पर बोरियां ढोईं, सफाई की

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अक्सर देखने में आया है कि बड़े ओहदे के अधिकारी दुर्घटना, आपदा, बाढ़ या भूकंप आने वाली जगहों पर सिर्फ निरीक्षण करने ही आते हैं और लोगों से बात कर के सर्वे कर लौट जाते हैं, लेकिन केरल के कोच्ची में बाढ़ पीड़ितों के राहत शिविर में दादरा नगर हवेली के कलेक्टर आईएएस कानन गोपीनाथ लगातार आठ दिनों तक अपनी पहचान छिपाकर राहत कार्य में जुटे रहे।

हाल ही में केरल भीषण बाढ़ से उभरा है। जिस बाढ़ में लाखों रुपए का नुकसान हुआ और हजारों लोग घर से बेघर हो गए और कितने लोगों की जान भी चली गई। इस प्राकृतिक आपदा के दौरान भारतीय थलसेना और वायुसेना ने भी कई लोगों की मदद की और कई लोगों की जान भी बचाई और उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाया। कई नेता और अधिकारी तो सिर्फ यहां मदद करने का झूठा दिखावा करने ही आए थे। पीड़ित लोगों को खाना देते समय उनसे हाल जानते समय विशेष तौर पर वीडियो बनाया जाता था और सोशल मीडिया पर अपलोड कर लाखों-करोड़ों लाइक्स बटोरे जाते थे।

परंतु 2012 बैच के आईएएस कानन गोपीनाथ, जो मौजूदा समय में दादरा एवं नागर हवेली में बतौर जिला कलेक्टर तैनात हैं, कोच्ची में बाढ़ पीड़ितों के राहत शिविर में लगातार आठ दिन तक अपनी पहचान छिपाकर राहत कार्य में जुटे रहे। राहत कार्य के दौरान उन्होंने अपने सिर पर बोरियां ढोईं, शिविर में सफाई की और बच्चों को गोद में भी खिलाया। यह उनकी उदारता और दरियादिली ही थी, जो कलेक्टर रहते हुए भी वे सफाई और बोरियां ढोने का काम कर रहे थे।

दरअसल, आईएएस कानन गोपीनाथ केरल मुख्यमंत्री राहत कोष में देने के लिए दादरा नगर हवेली की ओर से एक करोड़ रुपए का चेक देने पहुंचे थे। जब वे राहत शिविर पहुंचे तो वहां के बिगड़े हुए हालात देखकर वहीं राहत कार्य में जुट गए। यहां गोपीनाथ अलग-अलग राहत शिविरों में सेवा देते रहे। गोपीनाथ की पहचान उजागर होने के बाद उन्होंने खेद जताते हुए कहा, “उन्होंने कोई महान काम नहीं किया। असल हीरो तो वह लोग हैं, जो बाढ़ग्रस्त इलाकों में भीतर घुसकर लोगों को सुरक्षित निकाल रहे हैं।”

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