कांवड़ियों की आस्था का केंद्र है ये कुंड

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सावन मास में भगवान भोलेनाथ की खास पूजा-अर्चना की जाती है| भगवान महादेव के भक्त अपनी- अपनी  आस्था और मान्यताओं के अनुसार शिवालयों में उमड़ते हैं| कहते हैं कि सावन माह में भगवान शिवभक्तों के पूजन और अभिषेक से प्रसन्न ही नहीं होते अपितु उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं| इंदौर के प्राचीन बाणेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, जिसका इतिहास रामायण काल से जुड़ा है|

वनवास काल में आए थे राम

मान्यता यह भी है कि भगवान राम अपने 14 वर्ष के वनवास काल में यहां पहुंचे थे| कहा जाता है कि माता सीता को यहां पानी की प्यास लगी| तब भगवान राम ने सीताजी की प्यास बुझाने के लिए बाण चलाकर पानी निकाला| इस स्थान पर एक कुंड बन गया, जिसे कालांतर में बाणेश्वर कुंड नाम मिला| बाणेश्वर महादेव मंदिर इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में है, जहां हर दिन भक्तों का मेला लगता है|

अहिल्यादेवी ने करवाया था जीर्णोद्धार

प्राचीन बाणेश्वर कुंड और भगवान बाणेश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार लगभग 300 वर्ष पूर्व देवी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था| यह स्थान इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में स्थित है| कहा जाता है कि यहां सावन माह में एक लोटा जल चढ़ाने से ही हर मुराद पूरी हो जाती है| यहां आने वाले भक्त दर्शन मात्र से ही अपना जीवन धन्य मान लेते हैं |

हर दिन पहुंचते हैं भक्त

इंदौर के इस बाणेश्वर महादेव मंदिर और कुंड के दर्शन करने हर दिन भक्त पहुंचते हैं| भक्त यहां पहुंचने के बाद शिवभक्ति में लीन हो जाते है| भक्त यहां कुंड की पूजा करते है और कुंड का जल लेकर शिवालयों में पहुंचते हैं और शिवाभिषेक करते है| इस शिवालय से अनेक कावड़यात्राएं निकलती है| यह स्थान शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है|

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