आखिर किसका था आरक्षण का फैसला…

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प्रधानमंत्री मोदी का हर फैसला चौकाने वाला होता है। जैसे नोटबंदी कर प्रधानमंत्री मोदी ने सभी को हैरत और परेशानी में डाल दिया था, वैसे ही सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के फैसले ने एक बार सभी को चौंका दिया। अब ऐसे में एक सवाल सभी के मन में उठने लगा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लिया गया यह फैसला अचानक लिया गया या फिर इसे भी नोटबंदी की तरह सबसे छुपा कर रखा गया था। दरअसल विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों में मिली करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई थी। आगामी लोकसभा चुनाव में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी को यह फैसला लेना पड़ा।

इस पूरे मामले में एक सूत्र ने जानकारी दी कि सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला मोदी सरकार द्वारा आनन-फानन में लिया गया। एक तरफ तीन राज्यों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, तो वहीं दूसरी तरफ उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन ने भाजपा की मुश्किलों को और बढ़ा दिया। ऐसे में पिछले हफ्ते प्रधानमत्री कार्यालय में उत्तरप्रदेश को लेकर एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक का दौर काफी लंबा चला और इसमें  नीति आयोग समेत कई मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश में दखल रखने वाले कई उच्च अधिकारियों को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री द्वारा उत्तरप्रदेश में सरकार और पार्टी की छवि को सुधारने के लिए अधिकारियों से सुझाव मांगे गए। इस पर अधिकारीयों द्वारा कई सुझाव भी पेश किए गए, लेकिन वे इतने असरकारक नहीं थे कि आगामी लोकसभा चुनाव में अपना असर दिखा सकें।

इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं और संघ के नेताओं को भी बुलाया। सूत्रों की माने तो संघ के नेताओं ने कहा कि अदालत में फैसला बदलने से भाजपा के परंपरागत वोटर एससी/एसटी काफी नाराज हैं, जिसका सीधा असर तीन राज्य में देखने को मिला। ऐसे में पार्टी को पुराने मतदातों को जोड़े रखने और नए मतदाताओं को जोड़ने की चुनौती से निपटना था। इस बात को ध्यान में रखते हुए सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की तैयारी में पूरी पार्टी जुट गई। इस मामले में गुरुवार से लेकर रविवार तक पूरे दिन बैठकों का सिलसिला चलता रहा। इन बैठकों में कानून मंत्रालय, सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय, गृह मंत्रायल आदि के शीर्ष अफसरों को पीएमओ बुलाया गया। बैठक के बाद सभी को चुप रहने की नसीहत भी दी गई। पूरी बातचीत होने के बाद सोमवार को कैबिनेट ने आर्थिक आधार पर सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला ले लिया और सभी को हैरानी में डाल दिया। (प्रभात)

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