हिन्दी दिवस: हिन्दू ने नहीं बल्कि इस फ़ारसी ने लिखी थी हिन्दी की पहली कविता

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आज पूरे देश में हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है| हिन्दी के कई शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं| हिन्दी को विश्व पटल पर प्रसिद्ध करने का सपना धीरे-धीरे साकार होते जा रहा है| हिन्दी बोलचाल से निकलकर राजभाषा और सरकारी दफ्तरों से निकलकर विश्व पटल पर उदय होते सूर्य की तरह चमक रही है| दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा के कई शब्दों को फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, ब्लॉगस्पॉट, वॉट्सएप और गूगल पर भी हिन्दी में लिखने और पढ़ने की सुविधा मिलती है| क्या आप जानते हैं कि हिन्दी में साहित्य का उदय कैसे हुआ था? इस भाषा में लिखे गए साहित्य किसके द्वारा लिखे गए थे? दरअसल, हिन्दी की पहली कविता और साहित्य किसी हिन्दू ने नहीं बल्कि एक फ़ारसी व्यक्ति ने लिखे थे|

हिन्दी दिवस – अमीर खुसरो का अहम योगदान

हिन्दी भाषा के तुलसीदास, कबीरदास, सूरदास जैसे कई कवि रहे, लेकिन इस भाषा में पहली कविता एक फ़ारसी कवि द्वारा लिखी गई थी| कहा जाता है कि हिन्दी (खड़ी बोली) की पहली कविता जाने-माने कवि अमीर खुसरो ने लिखी थी| अमीर खुसरो ने हिंदुस्तान की संस्कृति को काफी करीब से समझा और हिन्दी के प्रचार में अहम योगदान दिया था| इतना ही नहीं हिन्दी भाषा के इतिहास पर पहले साहित्य की रचना भी ‘ग्रासिन द तैसी’ एक फ्रांसीसी लेखक ने की थी|

भारत की राजभाषा हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत पहचान मिल चुकी है| दुनिया में सबसे ज्यादा उपयोग की जाने वाली ‘ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी’ में हिन्दी के कई शब्दों को जगह मिल चुकी है| अरे, जुगाड़, गुलाब जामुन, दादागिरी जैसे शब्दों को अब विश्व के सभी अंग्रेजी भाषी देश के लोग प्रयोग कर रहे हैं|

 ‘ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी’ में जुड़े कुछ हिन्दी शब्द

अब्बा, अम्मा, गुलाब जामुन, वड़ा, जुगाड़, दादागिरी, बापू, सूर्य नमस्कार, चमचा, मिर्च मसाला, चुप, नाटक, अईयो, अरे यार, चूड़ीदार, भेलपुरी, पापड़, ढाबा, बदमाश, अच्छा, आलू, देसी, गोरा, जंगली, यार पूरी, चटनी, दीदी, मसाला, और पक्का जैसे कई शब्द ‘ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी’ में जुड़ चुके हैं|

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