मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन कार्यकारी अध्यक्ष से अध्यक्ष होंगे

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द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानि डीएमके पार्टी को करुणानिधि के बाद अपना नया अध्यक्ष मिल गया है। करुणानिधि ने 50 साल तक डीएमके की कमान संभाली थी। देश में अभी तक किसी भी राजनेता ने इतने लम्बे समय के लिए पार्टी की कमान नहीं संभाली है। मंगलवार को चेन्नई में पार्टी की हुई महत्वपूर्ण बैठक में इसकी घोषणा की गई। इससे पहले वे पार्टी के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। पिता के निधन के बाद से खाली पड़ा पार्टी अध्यक्ष का पद अब मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन संभालेंगे।

करुणानिधि ने साल 2016 में स्टालिन को अपना वारिस घोषित कर दिया था। करुणानिधि ने अपने जीवित रहते हुए ही यह तय कर दिया था कि उनके बाद डीएमके की कमान उनके बड़े बेटे अलागिरी के बजाय स्टालिन संभालें।  1 मार्च 1953 को जन्मे एमके स्टालिन को नाम भी उनके पिता करुणानिधि ने जोसेफ स्टालिन से प्रभावित होकर दिया था। स्टालिन ने चेन्नई में मद्रास विश्वविद्यालय के नंदनम आर्ट्स कॉलेज से इतिहास विषय में ग्रैजुएशन की है।  1975 के आपातकाल में स्टालिन को जेल जाना पड़ा था। जेल जाने के बाद ही वे सबसे ज़्यादा चर्चा में आए थे। मीसा के तहत उन्हें जेल में बंद किया गया था। पिता के नक़्शे कदम पर चलते हुए स्टालिन ने अपनी राजनीति  14 साल की उम्र में शुरू कर दी थी।

तमिलनाडु की राजनीति को समझना भी थोड़ा मुश्किल है। इसका अंदाज़ा स्टालिन की चुनावी हार से ही लगाया जा सकता है। करुणानिधि के बेटे होने के बावजूद एमके स्टालिन अपना पहला चुनाव हार गए थे। एआईएडीएमके उम्मीदवार केए कृष्णास्वामी से उन्हें हार मिली थी। मंत्री बनने से पहले स्टालिन ने 1996 में चेन्नई के मेयर के रूप में भी काम किया है । स्टालिन के राजनीतिक पथ पर अलागिरी उनके लिए सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन सकते हैं।

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