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Hasya Kavi Pradeep Chaubey का निधन

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हिंदी मंचों के धुरंधर हास्य-कवियों में शामिल प्रदीप चौबे (Hasya Kavi Pradeep Chaubey) का दुखद निधन हो गया है| उन्होंने ग्वालियर में अंतिम साँस ली | ‘हास्य-गैस सिलेंडर’ के नाम से जाने जाने वाले प्रदीप नॉन स्टॉप हंसी की गारंटी थे | हँसाने की उनकी शैली , अंदाज़े-बयाँ , अनूठा तरीका कवी सम्मेलनों की शान रहा |इसके बाद साहित्य जगत गम में डूब गया है। दिल की बीमारी के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया जहा उनका निधन हो गया | मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर के रहने वाले हास्य कवि रस प्रदीप चौबे (Hasya Kavi Pradeep Chaubey) को बड़े भाई हास्य के महापंडित कवि स्व. शैल चतुर्वेदी से विरासत में मिला | प्रदीप चौबे एक मँजे हुए शायर भी हैं और बहुत खूबसूरत गज़लें भी लिखा करते थे|उन्हें करीब से जानने वालो के अनुसार वो जितना लोगों को हंसाते थे उनता ही अपने अंदर के गम को महफूज रखने की कला भी जानते थे |उन्हें गाल ब्लैडर का कैंसरथा। पिछले दिनों हुई छोटे बेटे के आकस्मिक निधन के बाद उन्हें गहरा सदमा लगा|

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26 अगस्त, 1949 को चंद्रपुर (महाराष्ट्र) में जन्मे इस कवी ने कला से स्नातक नागपुर वि.वि. से किया |

Hasya Kavi Pradeep Chaubey की कुछ रचना : ‘बहुत प्यासा है पानी’, ‘खुदा गायब है’ (गज़ल संग्रह), ‘बाप रे बाप’ (हास्य-व्यंग्य कविताएँ), ‘आलपिन’ (छोटी कविताएँ), ‘चले जा रहे हैं’ (हास्य-व्यंग्य गज़लें) एवं कुछेक गद्य-व्यंग्य रचनाओं का कन्नड़ व गुजराती भाषाओं में प्रकाशन भी हुआ | ‘आरंभ-1’ (वार्षिकी), ‘आरंभ-2’ (गज़ल विश्वांक-1), ‘आरंभ-3’ (गज़ल विशेषांक), ‘आरंभ-4’ (गज़ल विश्वांक-2) का संपादन भी उन्होंने किया |

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Hasya Kavi Pradeep Chaubey को मिले सम्मान-पुरस्कार : पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा द्वारा लोकप्रिय हास्य-कवि के रूप में सम्मानित, ‘काका हाथरसी पुरस्कार’, ‘अट्टहास युवा पुरस्कार’, ‘टेपा पुरस्कार’, ‘अट्टहास शिखर पुरस्कार| बैंकॉक, हाँगकाँग, सिंगापुर, दुबई, बेल्जियम, अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, मस्कट, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन आदि देशों में काव्यपाठ किया था|

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