तारक मेहता के ‘उल्टे चश्मे’  से हंसती दुनिया

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जैसे ही ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ का नाम आता है तो सभी के मन में दया भाभी, जेठालाल, तारक मेहता और अन्य कलाकारों का खयाल आ जाता है| टेलीविजन के इस शो ने दर्शकों को खूब हंसाया है| सभी उम्र के लोग इसे पसंद करते हैं| हमने शो में हमेशा जेठालाल को अपने परम मित्र तारक मेहता के पास समस्या लेकर जाते देखा है, लेकिन क्या आप असली तारक मेहता (Taarak Mehta Birth Anniversary 2018) को जानते हैं, जिनके कारण आप यह शो देख पाते हैं|

गुजराती भाषा के मशहूर और लोकप्रिय साहित्यकार और स्तंभकार तारक मेहता को इसका श्रेय जाता है| तारक मेहता की पहचान एक व्यंग्यकार और हास्य लेखक के तौर पर होती रही है| आज के ही दिन एक ऐसे कलाकार का जन्म (Taarak Mehta Birth Anniversary 2018) हुआ था, जिन्होंने कई चेहरों पर हंसी बिखेरी| तारक मेहता ने कई हास्य किताबों का गुजराती में अनुवाद भी किया था और वे गुजराती थियेटर के भी जाने-माने नाटककार रहे हैं| उन्होंने ‘ए दुनिया पंजारापोले’, ‘एक्शन रीप्ले’, ‘अल्बेलुन अमेरिका-वानथेलुन अमेरिका’, ‘चंपकलाल तापुनी जुगलबंदी’, ‘बेताज बताली-पोपटलाल’ जैसी कई किताबें लिखी है|

उन्होंने साल 1971 में गुजराती पत्रिका चित्रलेखा में स्तंभ लिखना शुरू किया था, जिसे बाद में गुजराती अखबार दिव्य भास्कर में ‘दुनिया ना औंधा चश्मा’ के नाम से प्रकाशित किया जाने लगा| पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए तारक मेहता (Taarak Mehta Birth Anniversary 2018) का 87 साल की उम्र में गुजरात के अहमदाबाद में निधन हो गया था| वे अपने कॉलम में ज्यादातर आम लोगों से जुड़े किस्से-कहानियों को बहुत ही रोचक तरीके से सुनाया करते थे|

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के नए ‘डॉ. हाथी’

दिलों पर राज कर रहा  ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’

‘तारक मेहता…’ की सफलता टीमवर्क का नतीजा

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