पुलिसकर्मियों के लिए जारी की गई गाइडलाइन

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आज कल सोशल मीडिया साइट्स का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है| आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिसकर्मी भी सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं|  कई बार पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे दस्तावेज या अविवेकपूर्ण टिप्पणी कर देते हैं, जिससे वे या अधिकारी मुश्किल में पड़ जाते हैं|

मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ऋषि कुमार शुक्ला ने पुलिसकर्मियों को हिदायत दी है कि, सोशल मीडिया पर सेल्फी, फोटो, स्टेटस अथवा किसी भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने से वे परहेज करें|

पुलिस महानिदेशक ने अपनी नसीहतों में कहा है कि, यह देखने में आ रहा है कि पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में रहकर भी अधिकारी/कर्मचारी अलग-अलग मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बेवजह की  टिप्पणी करते रहते हैं| उन्होंने जिक्र किया कि कुछ पुलिस अफसरों ने फेसबुक, वाट्सएप, टि्वटर, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब एवं ब्लॉग ब्लाग सहित सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर अनुचित, अमर्यादित और आपत्तिजनक सामग्री अथवा टिप्पणी पोस्ट की हैं| इनकी वजह से उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई|

गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों को यह नहीं करने की हिदायत-

  • सोशल मीडिया पर शासकीय दस्तावेजों अथवा ऐसी जानकारी शेयर न की जाए, जिसकी गोपनीयता आवश्यक हो|
  • कोई ऐसी टिप्पणी या फोटो सामग्री जो दुर्भावनापूर्ण, अश्लील, जाति, धर्म, लिंग अथवा किसी वर्ग के साथ पक्षपात प्रदर्शित करती हो| उस पर प्रतिक्रिया के बजाय ऐसी जानकारी अपने वरिष्ठ अफसर को बताएं|
  • फेसबुक, वाट्सएप अथवा अन्य किसी सोशल मीडिया पर फर्जी नाम से अपना प्रोफाइल अथवा पेज न बनाएं| किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट व शेयर न करें|
  • विशिष्ट अथवा अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के दौरान ड्यूटी में तैनात अधिकारी-कर्मचारी महत्वपूर्ण स्थलों के ऐसे फोटो अथवा सेल्फी न डालें जो सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए|
  • व्हाट्सएप समूह आदि पर अपनी ओर से टिप्पणी या फिर किसी पोस्ट का समर्थन करने में अति उत्साह न दिखाएं|

 

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