Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan Yojana : गरीबों को रिझाने के लिए ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’

0

कोरोना काल में मजदुर भूख से मर रहे है लेकिन सरकार अपना वोट बैंक तगड़ा करने की जुगत में है. इसी क्रम में राज्यसभा की जोड़ तोड़ के बाद बिहार चुनाव की तैयारी और अब आम चुनावों तक की सोच के साथ सरकार 50,000 करोड़ रुपये की ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ (Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan Yojana) की बात लेकर आई है. चीन, नेपाल और कोरोना को भूल कर सरकार ने इस अभियान को ‘गड्ढे खोलने वाली’ मनरेगा से अलग बता कर खुद को आगे किया और गरीबों के मसीहा बबनने की कोशिश की. मनरेगा में 202 रुपये मजदूरी और साल के 100 दिन काम की गारंटी की बातें हैं. लेकिन पीएम ने नई योजना में क्या किया इसका कोई खुलासा नही है.  

PM गरीब कल्याण रोजगार अभियान : 125 दिन ...

Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan Yojana :

‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ (Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan Yojana) को लेकर दावा किया गया है कि इसे देश के 733 में से 116 जिलों में 125 दिनों तक प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए मिशन मोड में चलाया जाएगा. ये जिले 6 राज्यों – बिहार (32), उत्तर प्रदेश (31), मध्य प्रदेश (24), राजस्थान (22), ओडिशा (4) और झारखंड (3) के हैं.

इनमें से बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश 1980 में बीमारू राज्य की गिनती में है और इन्ही के टुकड़े झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड भी इसी श्रेणी में सफर कर रहे है. ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ में 12 विभिन्न मंत्रालयों ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नयी और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि की भागीदारी है.

Pm Narendra Modi Live In Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana ...

अब दर्जन भर मंत्रालयों केसे आपस में साथ कम करेंगे इसका तो भगवान् ही मालिक है.  साथ ही हिस्सेदारी भी बढ़ी… काम की हिस्सेदारी ..अब जब इतने मंत्रालय काम करेंगे तो काम जल्दी होगा या देरी से यह भी प्रश्न है . साथ ही 50,000 करोड़ रुपये के कितने हिस्से करने होंगे यह एक अलग गणित है.50,000 करोड़ रुपये के ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ में मजदूरी का हिस्सा करीब आधा मान कर भी चले तो 25,000 करोड़ रुपये  के हिसाब से हर जिले को 1.72 करोड़ रुपये हस्से आएंगे.

अब स्किल्ड प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के मजदूरों के मुकाबले डेढ गुना वेतन बोले तो 300 रुपये रोज आयेगा. मतलब 1.72 करोड़ रुपये पर हर जिले में 57,471 प्रवासी मजदूर का हक़ होगा …..लेकिन 125 दिनों तक. वित्त मंत्रालय ने 2016 के आर्थिक सर्वेक्षण में देश में कुल कामगार 48 करोड़ से ज्यादा होने की बात कही. उम्मीद है उन्माद से पहले  सरकारी अमला इस अभियान को जमीनी हकीकत में बदल पाए. अन्यथा जो होना है वो तो भारत की नियति ही है.  

Employment News - हज़ारों गरीब-किसान-मजदूर ...

Share.