गंगा की सफाई पर खर्च होंगे 18,000 करोड़

2

केंद्र की मोदी सरकार गंगा की सफाई को लेकर काफी सतर्क है। उसकी साफ-सफाई और रखरखाव पर सरकार पूरा ध्यान दे रही है। सरकार गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। अगले छह महीने में गंगा कुछ साफ नज़र आने लगेगी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह दावा किया है ।

उन्होंने कहा कि गंगा की सफाई के लिए 18,000 करोड़ रुपए की लागत से सात राज्यों में 115 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं। इसके साथ नदी किनारों के विकास तथा गंगा पर राष्ट्रीय जलमार्ग -1 के विकास के जरिये कार्गो परिवहन को प्रोत्साहन की योजनाओं पर भी कार्य चल रहा है।

सात राज्यों में सीवेज ट्रीटमेंट परियोजना

गडकरी ने कहा कि गंगा को निर्मल और साफ बनाने के लिए सरकार यूपी, बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हरियाणा में 17,876.69 करोड़ रुपए की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट परियोजना शुरू होने वाली है। उन्होंने कहा, “115 नए सीवेज प्लांट गंगा नदी के पास कुल 240 सीवेज प्लांट विकसित करने के आधारभूत ढांचे का हिस्सा हैं। 27 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य हो चुका है। साथ ही 42 कार्य प्रगति पर है और 34 अन्य परियोजनाओं के लिए टेंडर निकाले जा चुके हैं।

यूपी में 32 प्रोजेक्ट

32 प्रोजेक्ट यूपी, 31 उत्तराखंड, 20 बिहार, 16 पश्चिम बंगाल और दो झारखंड और दो हरियाणा में बनने वाले हैं। गडकरी ने कहा कि हम नई परियोजनाएं शुरू कर रहे हैं बल्कि 84 पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की समीक्षा भी हो रही है। 39 प्लांट ठीक से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 14 परियोजनाओं में सुधार का कार्य शुरू हो चुका है और 12 के लिए मंजूरी दी गई है।

क्लीन गंगा परियोजना के तहत सफाई

उन्होंने कहा कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे 48 शहरों की पहचान की गई है, जो नदी को प्रदूषित कर रहे हैं। क्लीन गंगा परियोजना के तहत इनकी सफाई की जाएगी। उन्होंने कहा, कि विस्तृत डीपीआर रिपोर्ट अक्टूबर तक आएगी। केंद्र सरकार साल 2015 में परियोजना नमामि गंगे के तहत 20,000 करोड़ रुए मंजूर किए गए।

Share.