जोशी को आयोग ने थमाया नोटिस

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राजस्थान में चुनावी प्रचार को लेकर सभी राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज़ हो गई है। इसी जुबानी जंग में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी इतने आक्रामक हो गए कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उमा भारती की जाति पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया। उनके इस विवादित बयान से राजस्थान की सियासत बेहद गरमा गई और बयानबाजी का दौर चल पड़ा। जहां जोशी की पार्टी ने उनके इस बयान से किनारा कर लिया वहीं भाजपा ने जोशी पर पलटवार की झड़ी लगा दी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जोशी को इस तरह की बयानबाजी के लिए फटकार भी लगाई और ट्वीट कर जोशी से अपने बयान पर खेद प्रकट करने को भी कहा, जिस पर जोशी ने भी तत्काल ही ट्वीट कर अपने बयान पर माफ़ी मांगी थी, लेकिन बात यहां खत्म नहीं हुई और जोशी पर अब आदर्श आचार संहिता उल्लंघन की तलवार लटकने लगी है। जोशी के इस बयान पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार के निर्देश पर नाथद्वारा रिटर्निंग अधिकारी ने जोशी को नोटिस थमा दिया है और उनसे आगामी 25 नवंबर तक इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।

जोशी का जवाब आने पर निर्वाचन अधिकारी फैसला लेंगे कि उनका यह बयान किस भावना से प्रेरित था और यह आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आता है या नहीं। उसके बाद निर्वाचन विभाग को लगता है कि सीपी जोशी द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन किया गया है तो आयोग द्वारा उन पर मुकदमा दायर किया जाएगा।

अपने बयान में जोशी ने मोदी और उमा भारती पर निशाना साधते हुए कहा था कि बीजेपी कांग्रेस को मुस्लिमों की पार्टी बताती है। यह लोग कौन हैं सर्टिफिकेट देने वाले? पीएम मोदी और उमा भारती की क्या जाति है?’ जोशी के इस बयान के बाद उमा भारती ने जवाब देते हुए कहा था कि हमारी जात नहीं, पूरी जमात है। जोशी चाहें तो हमारी जमात में शामिल हो सकते हैं। सीपी जोशी राजसमंद के नाथद्वारा से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं और फिलहाल काफी मुश्किल में फंस गए हैं।

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