कभी थीं राज्यमंत्री, आज बकरियां चराने को मजबूर

0

वक्त इंसान को कब अर्श से फर्श पर ला पटके कोई पूर्वानुमान नहीं लगा सकता है| समय का साथ नहीं मिले तो बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर चुका इंसान भी कब अंधेरे में खो जाए, कुछ पता नहीं चलता है| मध्यप्रदेश में कभी राज्यमंत्री के पद पर रहीं, लाल बत्ती की गाड़ी में घूमने वाली महिला जूली आज बकरियां चराकर अपना पेट पालने को मजबूर है| कभी राजनीति का सफ़र करने वाली राज्यमंत्री, जिसे बड़े से बड़ा अधिकारी भी सलाम करता था, वह आज दो जून की रोटी के लिए जद्दोजहद कर रही है|

मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की रहने वाली जूली को कभी राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था| भ्रष्टाचार के कारण सरकारी बंगले में रहने वाली जूली टपरी में रहने को मजबूर हो गई| दरअसल, राज्यमंत्री बनने से पहले भी जूली मजदूरी ही करती थी| 2005 में वह जिला पंचायत की सदस्य बनी, फिर उन्हें शिवपुरी के पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया| इसके बाद पांच साल तक वे राज्यमंत्री बनी रहीं|

दरअसल, जब जूली राज्यमंत्री के पद से हटी तो उनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं गया| वे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हो गई| उन्हें इंदिरा आवास योजना के तहत कुटीर तो स्वीकृत हुई थी, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण वह भी नहीं मिल पाई| अब जूली बकरियां चराकर जीवन यापन कर रही हैं| उन्हें एक बकरी चराने के 50 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं और वे 50 बकरियों को चराकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं| खाली समय में वे मजदूरी भी करती हैं|

Share.