पहले मतदाताओं को जोड़ने की मुहिम 

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव है, ऐसे में भाजपा अभी से ऐसा माहौल तैयार करने का प्रयास कर रही है, जिसका लाभ पार्टी को सीधे और पहली बार में ही मिल सके| भाजपा ने अपने अभियान के तहत पहली बार मतदान में हिस्सा लेने वाले युवा वोटरों पर फोकस करना शुरू कर दिया है |

हालांकि पार्टी का यह प्रयास कितना कारगर साबित होता है, यह चुनाव और इसके बाद आने वाले नतीजे तय करेंगे, लेकिन पार्टी हर छोटे-बड़े आयोजनों में युवाओं को जोड़ने का काम कर रही है | इसके लिए पार्टी के नेता खुद की सरकार के किए कामों से कुछ ज्यादा कांग्रेस के 10 साल के कार्यकाल पर अधिक फोकस कर उसकी खामियां गिनवा रहे हैं | भाजपा नेता कांग्रेस सरकार के समय का मध्यप्रदेश में अपने भाषणों से बयां कर रहे हैं| वे यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि कांग्रेस के शासन में पानी, बिजली,सड़क और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की कितनी दुर्दशा रही है|

15 साल से भाजपा की सरकार प्रदेश में काबिज है और इससे पहले 10 साल कांग्रेस की दिग्विजयसिंह सरकार रही| जिस समय सिंह की सरकार रही, आने वाले चुनाव का मतदाता उस समय महज 3 साल का था| इस मतदाता ने न तो दिग्विजयसिंह का कार्यकाल देखा और न ही उसे इस बात की समझ होगी कि उस वक्त के हालात क्या रहे हैं| अब भाजपा पहली बार वोट देने निकलने वाले पहले मतदाता को दस साल का दिग्विजय शासन पढ़ाने का काम कर रही है, जिसमें नेता हर सभा में किसान, सिंचाई का रकबा, बिजली और सड़क जैसे मुद्दों पर आंकड़े भी बता रहे हैं| इस काम में पार्टी के छोटे नेता से लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह तक जुटे हुए हैं|

50 लाख नए मतदाता

प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस बार करीब 50 लाख नए मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकते हैं| ये नए मतदाता चुनाव परिणामों को भी कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं| इस बात का अंदाजा होते ही भाजपा ने कमर कस कर नए वोटरों पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है| हालांकि पार्टी को इस बात का अहसास भी है कि यह पहला मतदाता पूरी तरह उसी के कब्जे में रहने वाला नहीं है क्योंकि भाजपा, कांग्रेस का शासन कितना भी पढ़ाए, लेकिन 15 साल के भाजपा की सरकार के कामकाज का वो स्वतः गवाह है| वह अपना निर्णय अपनी सोच के मुताबिक ही लेगा|

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