राजनीति विज्ञान की किताब में गोधरा दंगों का ज़िक्र, एफआईआर दर्ज

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2002 में गुजरात के कई इलाकों में दंगा भड़का, जिसमें 1200 से अधिक लोग मारे गए। यह एक बहुत बुरा हादसा था, जिसे आज भी हर कोई भूलना चाहता है, लेकिन असम में 12वीं क्लास की राजनीति विज्ञान की एक रेफ़रेंस बुक में गोधरा दंगों का ज़िक्र कर दिया गया। इस मामले के खिलाफ किताब के प्रकाशक और तीन लेखकों के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है।

दर्ज की गई एफ़आईआर में लेखकों और प्रकाशक पर छात्रों को ‘मशहूर प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ गुमराह करने’ का आरोप लगाया गया है। पहली बार 2006 में प्रकाशित की गई इस किताब में लगभग 390 पेज हैं। किताब के आख़िरी चैप्टर में गोधरा दंगों का ज़िक्र किया गया है। साथ ही लिखा गया है कि दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार मूकदर्शक बनी रही।

मामले की पड़ताल करने पर किताब के एक लेखक ने नाम ज़ाहिर न किए जाने की शर्त पर कहा, “उन्होंने किताब एनसीईआरटी के मानकों को ध्यान में रखते हुए ही लिखी थी।”

27 फ़रवरी 2002 को रेलवे स्टेशन पर साबरमती ट्रेन के एस-6 कोच में भीड़ द्वारा आग लगाए जाने के बाद 59 कारसेवकों की मौत हो गई। इसके परिणामस्वरूप पूरे गुजरात में साम्प्रदायिक दंगे होना शुरू हो गए। इन दंगों में हजारों लोग मारे गए थे। इन दंगों के बाद कई बड़े राजनेताओं के नाम सामने आए थे, जिन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। मामला कोर्ट तक पहुंचा।

उच्चतम न्यायालय ने गोधरा ट्रेन जलाए जाने के मामले सहित दंगे से जुड़े सभी मामलों की न्यायिक सुनवाई पर रोक लगा दी। 18 जनवरी 2011 को उच्चतम न्यायालय द्वारा  फैसला सुनाने पर से प्रतिबंध हटाए जाने के बाद 22 फरवरी को विशेष अदालत ने गोधरा कांड में 31 लोगों को दोषी पाया, जबकि 63 अन्य को बरी कर दिया।

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