कहां है, जीवन से जंग लड़ते पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली?

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सब कुछ ठीक चल रहा होता है, लेकिन अचानक कुछ ऐसा हो जाता है कि जीवन में सब कुछ बदल जाता है | देश के पूर्व वित्तमंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता अरुण जेटली के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ | तबियत ख़राब होने के बाद मेडिकल चेकअप के लिए अमेरिका गए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley Biography in Hindi) को सॉफ्ट टिश्यू सरकोमा नाम का एक दुर्लभ किस्म का कैंसर होने का पता चला और सब बदल गया है।

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सॉफ्ट टिश्यू सरकोमा अरुण जेटली (Arun Jaitley Biography in Hindi)  की जांघ में हुआ है| इलाज के लिए वह न्यू यॉर्क भी गए लेकिन, एक प्रकार का यह ट्यूमर अब उनके शरीर के अन्य भागों में जल्दी से फैल रहा है और इसका असर उनके स्वास्थ पर साफ देखा जा सकता है| इन सब के चलते जेटली ने सक्रीय राजनीति से दुरी बना ली है और वे लोकसभा चुनाव में भी वे नहीं लड़े और साथ ही केबिनेट में भी शामिल किये जाने से मना कर दिया | सरकार में जेटली के कद से हर कोई वाकिफ है |

 

 

 

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में नई मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले 29 मई को पूर्व वित्त मंत्री जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि वह स्वास्थ्य कारणों से नई सरकार में मंत्री नहीं बनना चाहते| राज्यसभा सदस्य जेटली ने कहा कि पिछले 18 महीनों से वह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं और इसलिए भविष्य में ‘किसी जिम्मेदारी’ से खुद को दूर रखना चाहेंगे| फ़िलहाल वे सियासत से ओझल से हो गए है और अरुण जेटली का इलाज जारी है | ऐसे में यह कहां जा सकता है कि आपका रुतबा, आपका पद और कामयाबी इन सब से बड़ा है वक्त और उससे जुड़े सत्य

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जेटली 2014 में अमृतसर से लोकसभा चुनाव हार गए थे, इसके बावजूद उनकी योग्यता को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा दिया|

जेटली को वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया| उन्हें उद्योग एवं वाणिज्य और कानून मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था|

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को एक पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ|

पिता महाराज किशन पेशे से वकील थे|

अरुण जेटली ने नई दिल्ली सेंट जेवियर्स स्कूल से 1957-69 तक पढ़ाई की|

श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और डीयू से 1977 में लॉ की डिग्री ली|

24 मई 1982 को जेटली की शादी संगीता जेटली से हुई|

इनके दो बच्चे हैं- रोहन और सोनाली|

अरुण जेटली दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में पढ़ाई के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े और 1974 में स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बने|

इमरजेंसी (1975-1977) के दौरान जेटली को मीसा के तहत 19 महीना जेल में भी काटना पड़ा|

1991 से ही अरुण जेटली बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे|

1999 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें बीजेपी का प्रवक्ता बना दिया गया|

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प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें 13 अक्टूबर 1999 को सूचना प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किया |

नवंबर 2000 में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया और कानून, न्याय और कंपनी मामले के साथ ही जहाजरानी मंत्रालय भी सौंप दिया गया|

2002 में इन्होंने अपने सभी पदों से इस्तीफा देते हुए वापस पार्टी के महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता बन गए|

फिर 29 जनवरी 2003 को वाजपेयी सरकार से जुड़ गए और केंद्रीय न्याय एवं कानून और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री बने|

3 जून 2009 को लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष चुने गए|

1980 से पार्टी में रहने के बावजूद जेटली ने कभी चुनाव नहीं था तो पार्टी ने उन्हें 2014 के चुनावों में सांसद नवजोत सिंह सिद्धू के जगह पर अमृतसर से उतारा|


लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ जेटली चुनाव हार गए|
अब जब बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए को 2014 के चुनावों में अभूतपूर्व सफलता मिली तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में वित्त और रक्षा मंत्रालय सौंप दिया|

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