भारत-चीन में तनातनी की पूरी खबर एक साथ

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भारत और चीन के बीच LAC पर सब कुछ ठीक कभी नहीं रहा और यह तनातनी पिछले कुछ दिनों से और बढ़ गई है. हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे लेकर कहा कि, ” मुद्दा सुलझाने के लिए चीन को समर्पित होना पड़ेगा.” वहीँ भारतीय सेना  के बयां है कि भारत और चीन के मिलिट्री कमांडर पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर बातचीत कर रहे हैं. चीन ने लद्दाख सेक्टर में 5000 सैनिक, टैंक और आर्टिलरी गन अपनी तरफ तैनात की हैं. भारत ने भी अतिरिक्त सैन्य बल भेजा है. यह बात सेना ने 31 मई को की  थी

 

तो आइये जानते है पुरे मसले को विस्तार से  बिन्दुवार –

 राजनाथ सिंह ने 2 जून को कहा था कि लद्दाख मामले को सुलझाने के लिए भारत और चीन के मिलिट्री लीडर 6 जून को मुलाकात करेंगे.

आगे उन्होंने कहा कि पहले भी दोनों देश मिलिट्री और डिप्लोमेटिक जरिए से तनाव कम कर चुके हैं. उन्होंने कहा, “डोकलाम मुद्दे के दौरान उसे राजनयिक ढंग से हल किया गया था और अब हम उनसे मिलिट्री के जरिए बात कर रहे हैं.”

राजनाथ सिंह ने रिश्तों में दरार को स्वीकारते हुए कहा था कि तनातनी पहले भी हुई है लेकिन इस बार मामला अलग है. उन्होंने कहा था कि चीन की सेना “इस बार कुछ ज्यादा दूर तक आ गई है”.

सीमा पर तनाव के बीच भारत के रक्षा मंत्रालय ने रेलवे से 11 ट्रेनें और करीब 11,815 मजदूरों को लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के काम के लिए भेजने का निर्णय भी लिया . केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 22 मई को रेल मंत्रालय से झारखंड से जम्मू और चंडीगढ़ के लिए स्पेशल ट्रेन चलवाने को कहा .

वही उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी 2 जून को लद्दाख पहुंचे. जहा उन्होंने परिस्थतियों का पूरा ब्यौरा लिया . उन्हें लद्दाख में सेना के कमांडरों के साथ बैठक का आदेश मिला हुआ है. 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह के साथ बैठक भी उनके दौरे का अहम् अंग होगी .

इन सब के बीच पूर्वी लद्दाख से 30 किमी की दूरी पर चीनी फाइटर एयरक्राफ्ट भारत पर नजर रख रहे है. सूत्रों के मुताबिक, होतान और गारगुंसा स्थित चीन की सेना PLA के एयर फोर्स बेस पर 10-12 फाइटर एयरक्राफ्ट पूर्वी लद्दाख से नजदीक खड़े है

दोनों देशो के बीच चल रहे घमासान पर अमेरिका ने भी चीन के भारत के खिलाफ आक्रामक रवैयेपर अपनी राय दी है . हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स के विदेशी मामलों की कमेटी के चीफ एलियट एंगेल ने चीन को बुलीकहा था. एंगेल ने कहा, “चीन को डिप्लोमेसी का इस्तेमाल कर सीमा विवाद को सुलझाना चाहिए.” एंगेल ने कहा, “मैं भारत-चीन सीमा पर चीन के आक्रामक रवैये को लेकर बहुत चिंतित हूं. चीन एक बार फिर दिखा रहा है कि वो अपने पड़ोसियों को बुली करने के लिए तैयार है.”

चीन के ग्लोबल टाइम्स ने भारत की सरकार को इस सब का जिम्मेदार करार देते हुए लिखा, “हालिया सीमा पर तनाव कोई घटना नहीं है, बल्कि नई दिल्ली की एक चाल है.”

अब चीन ने अपने ताजा बयान में कहा है कि सीमा पर भारत के साथ स्थिति स्थिर और नियंत्रणीयहै. दोनों देशों के बीच बातचीत के माध्यम हैं, जिसके जरिए डायलॉग और परामर्श से मुद्दे को हल किया जा सकता है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा, “दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आम सहमति को चीन लागू कर रहा है. हम अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए समर्पित हैं.”

फिलहाल चीन की सेना PLA ‘घुसपैठकी कम से कम दो जगहों से 2 किमी पीछे हट रही है.

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