रिपोर्ट : भारत में डॉक्टर्स की हालत बद से बदतर

0

बिहार (Bihar) में फैली जानलेवा चमकी बुखार ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा  है| अब तक  इस बीमारी से 140 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है| देश  में मेडिकल व्यवस्थायों (Medical facilities) को लेकर बदहाली खुलकर सामने आ रही है। सरकारी अस्पतालों (Goverment hospitals) की  हालत तो बद से बदतर होती जा रही है| स्वास्थ्य (Health) को लेकर सारी योजनाएं और इंतजाम चरमराते हुए नजर आ रहे हैं। WHO की रिपोर्ट के अनुसार 1000 व्यक्तियों पर 1 डॉक्टर का होना जरुरी है,  लेकिन भारत के कई राज्य हैं जहां ऐसा नहीं है|

वर्तमान में भारत जैसे विकासशील  देश में 11000 मरीजों  पर सिर्फ 1 डॉक्टर है। मौजूदा हालत को देखकर लग रहा है की देश की मेडिकल व्यवस्था (Medical facilities) को खुद इलाज की जरूरत है। बिहार (Bihar) जैसे राज्यों की हालत तो और चिंताजनक है, जहां 28391 लोगों पर केवल 1 डॉक्टर उपलब्ध है| डॉक्टर्स के साथ अस्पतालों की कमी से भी जूझ रहे हैं मरीज देश में कुल 23582 अस्पताल हैं, जिसमें 7,10,761 बेड हैं| 1. 3 अरब वाली आबादी के लिए यह काफी नहीं है।

दूर -दराज के क्षेत्रों में मरीजों को समय पर सेवा ही नहीं मिल पाती है| इसका सबसे बड़ा कारण डॉक्टरों की कमी होना है। जो लोग आर्थिक रुप से सक्षम हैं, उनके लिए तो निजी अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज करवाना संभव है, लेकिन जो लोग सक्षम नहीं हैं उन्हें हर तरफ से सरकार की उदासीनता का सामना कर पड़ रहा है।

सरकारी अस्पतालों में उन्हें पर्याप्त मात्रा में सुविधाएं(Facilities) भी नहीं मिल रही हैं| WHO कि एक और रिपोर्ट के अनुसार  देश की आबादी का 3. 9 प्रतिशत यानि 5.1 करोड़ भारतीय लोग  घरेलु बजट का केवल एक चौथाई ही इलाज (Treatment) पर खर्च करते हैं| ये सारे आकड़ें काफी चौंकाने वाले हैं| रोटी , कपड़ा ,मकान की तरह  ही स्वास्थ्य भी एक महत्वपूर्ण और बुनियादी जरूरत है| मलेरिया ,डेंगू ,मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों से देश लगातार संघर्ष कर रहा है| इसके बावजूद सरकार ने स्वास्थ्य विभाग (Medical department) की उपेक्षा की है|

Share.