मांगें नहीं मानी तो पड़ सकता है महंगा

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मध्यप्रदेश के एक लाख से अधिक वकील एक सप्ताह के लिए हड़ताल पर चले गए हैं| उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है|

बताया जा रहा है कि प्रदेश में वर्षों से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करवाने के लिए वकील सरकार से गुहार लगा रहे हैं| वकीलों की मांग में वकील प्रोटेक्शन एक्ट, प्रदेश में नियत पद अनुसार जजों की नियुक्ति करके पेंडिंग मामलों का निपटान करवाना और वकीलों के लिए चेम्बर्स की व्यवस्था करवाना शामिल है|

प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में वकीलों के हड़ताल पर जाने से न्यायालयीन कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है| इंदौर में भी इस हड़ताल का असर देखने को मिला| यहां पर उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय में सुनवाई के लिए पहुंचे कई लोगों  को बिना सुनवाई के ही लौटना पड़ा|

वकीलों ने सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि जजों के नियत पदों पर नियुक्ति की मांग स्टेट बार काउन्सिल द्वारा किए जाने के बावजूद सरकार इस दिशा में पहल नहीं कर रही है|

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