क़र्ज़ माफी के बाद भी आत्महत्या

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विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में जीत हासिल कर सत्ता पर काबिज होने वाली कांग्रेस सरकार ने किसानों की क़र्ज़ माफी की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की शपथ लेने के साथ ही कमलनाथ ने किसानों का क़र्ज़ माफ़ भी कर दिया, लेकिन फिर भी अन्नदाता आत्महत्या करने को मजबूर हैं। कर्ज तले दबे एक किसान की आत्महत्या का एक मामला मध्यप्रदेश के खंडवा से सामने आया है। जानकारी के अनुसार, खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र में एक किसान जुवानसिंह ने कर्ज के बोझ के कारण आत्महत्या कर ली।

आत्महत्या करने वाले किसान जुवानसिंह पर बैंक और सोसायटी का क़र्ज़ था। यह क़र्ज़ 5 लाख से भी ज्यादा का था। आत्महत्या की सूचना मिलते ही पंधाना तहसीलदार मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। किसान के बेटे का कहना है कि उसके पिता का नाम बैंक में डिफॉल्टर किसानों की सूची में है और इसी वजह से उसके भाई का रिश्ता भी टूट गया। वह खुद भी इस क़र्ज़ को चुकाने के लिए महाराष्ट्र में मजदूरी करता है। क़र्ज़ के कारण उसके पिता काफी मानसिक दवाब में थे और इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली।

किसान द्वारा आत्महत्या करने के बाद पंधाना की राजनीति में भूचाल आ गया है। अब इस आत्महत्या पर राजनीति ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। कांग्रेस द्वारा किया गया क़र्ज़ माफी का वादा पूरा होने के बाद भी एक किसान की आत्महत्या ने खंडवा की राजनीति को गरमा दिया है। खंडवा में कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। एक ओर जहां भाजपा विधायक ने कहा कि मध्यप्रदेश की सरकार किसानों से किए गए वादे के प्रति खरा नहीं उतरी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेत्री छाया मोरे ने इसे 15 साल की बीजेपी सरकार की गलत नीतियों का नतीजा बताया है।

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