मध्यप्रदेश सरकार से अतिथि विद्वानों की मांग

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मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा से अतिथि विद्वान कल्याण समिति ने नियमितीकरण की अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम, अपने महाविद्यायल के प्राचार्य को एक ज्ञापन सौंपा है। मध्यप्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी के तहत कई रोजगार उन्मुखी पाठ्यक्रमों का संचालन, विगत 20 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। 20 वर्षों से भी ज्यादा समय से संचालित किए जाने वाले इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत हर वर्ष, हजारों की संख्या में विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। हर वर्ष हजारों की तादाद में इन विद्यार्थियों को पूर्ण रूप से इन विषयों का अध्यापन अतिथि विद्वानों द्वारा ही कराया जाता है। ऐसे में पूरा अध्यापन इन अतिथि विद्वानों पर ही आश्रित है।

20 से भी अधिक वर्षों से उच्च शिक्षा विभाग के अनुमोदन पर संचालित किए जाने के बावजूद इन विषयों को अभी तक, परम्परागत विषयों में सम्मलित नहीं किए जाने पर पद सृजन नहीं किए गए। इसके अलावा इन अतिथि विद्वानों का इतने वर्षों में कोई नियमितीकरण भी नहीं किया गया जो सबसे बड़ी समस्या है। अतिथि विद्वानों की मांग है की जल्द से जल्द उनका नियमितीकरण किया जाए। विद्वानों ने जानकारी दी कि नियमितीकरण न हो पाने की वजह से उन्हें इतने वर्षों से वेतन की विसंगतियों के साथ ही कार्य करना पड़ रहा है। अपने नियमितीकरण के लिए अतिथि विद्वान समिति द्वारा 10 जनवरी गुरुवार के दिन, मुख्यमंत्री के नाम अपने प्राचार्य को एक विज्ञप्ति सौंपी गई।

इस विज्ञप्ति में अतिथि विद्वानों ने अपने नियमितीकरण की मांग की है। इस ज्ञापन में विद्वानों ने उल्लेख किया है कि उन्हें सामान कार्यों के लिए समान वेतन नहीं मिल पा रहा है। विद्वानों का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि, उनकी सरकार बनने पर पद सृजन कर अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण किया जाएगा। इसी वादे के संबंध में आज जनभागीदारी अतिथि विद्वानों एवं परम्परागत पाठ्यक्रमों में पद नियुक्ति को लेकर, अतिथि विद्वानों ने अपनी तीन सुप्रीम मांगों के लिए वर्तमान सरकार से बड़ी अपेक्षा के साथ मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।

जो तीन सुप्रीम मांगे अतिथि विद्वानों द्वारा की गईं हैं वे हैं कि –

1 जनभागीदारी द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों को परम्परागत पाठ्यक्रमों में सम्मलित कर पद सृजन किए जाएं।

2 वर्तमान समय में मध्यप्रदेश के शासकीय महाविद्यालय में जनभागीदारी पाठ्यक्रम के अंतर्गत अध्यापन कार्य कर रहे समस्त अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण किया जाए।

3 नियमितीकरण कि प्रक्रिया लागू होने तक वर्तमान में कार्यरत समस्त अतिथि विद्वानों को उच्च शिक्षा विभाग के आदेश के तहत, सामान कार्य, सामान वेतन की व्यवस्था लागू की जाए। (प्रभात)

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