चीन का समाजवाद का सिद्धांत बेहतर : दलाई लामा

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नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा आज 18 दिसंबर को बिहार के महाबोधि मंदिर पहुंचे। दलाई लामा के आने से पूर्व महाबोधि मंदिर परिसर उनके अनुयायियों से भरा पड़ा था। मगध प्रमंडलायुक्त टीएन बिंधेश्वरी के साथ लाखों लोगों ने उनका स्वागत किया। महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना कर धर्मगुरु दलाई लामा ने पवित्र महाबोधि वृक्ष को नमन किया। अपनी पूजा-अर्चना कर मंदिर से बाहर आने के बाद दलाई लामा ने पत्रकारों से बातचीत की।

अमन और शांति की प्रार्थना करने के बाद जब दलाई लामा पत्रकारों से रूबरू हुए, तब उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म शांति और अहिंसा का धर्म है। उन्होंने कहा कि बुद्ध की मुख्य शिक्षा करुणा है और इस पर आधारित है अहिंसा। बौद्ध धर्म का संदेश शांति, प्रेम, करुणा और आपसी भाईचारे का है।

धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि समाजवाद की अवधारणा पूंजीवाद से बेहतर है। चीन में समाजवाद की अवधारणा पर दलाई लामा ने कहा, “चीन का समाजवाद का सिद्धांत बहुत अच्छा है, लेकिन सत्ता का केन्द्रीकरण है, जो सही नहीं है। चीन में समाजवाद बेहतर रूप में नहीं है। सत्ता का केंद्रीकरण है जबकि इसका विकेंद्रीकरण होना चाहिए। शांतिप्रिय लोगों पर सख्ती नहीं हो तो वे रचनात्मक कार्यों में ज्यादा ध्यान देंगे। प्रकृति और जीव को करीब रहना चाहिए।“

गौरतलब है कि धर्मगुरु दलाई लामा गुरुवार को भोला बिगहा में सिक्किम बौद्ध मोनेस्ट्री का शिलान्यास करेंगे। इस शिलान्यास समारोह की सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए डीएम व एसएसपी समारोह स्थल पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का मुआयना किया।

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