हिमाचल की ‘राष्ट्रमाता’

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गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा अब हिमाचल प्रदेश में भी मिलने वाला है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के बाद अब गोमाता को हिमाचल की ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा प्रदान होने वाला है। इस प्रस्ताव को शीतकालीन सत्र के दौरान सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। अब इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास स्वीकृति प्रदान करने के लिए भेजा गया है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के तपोवन में चल रहे शीतकालीन सत्र के चौथे दिन इस प्रस्ताव को पारित किया गया। सदन में इस संकल्प प्रस्ताव को शिमला के कुसमपट्टी से कांग्रेस विधायक लेकर आए थे। इस प्रस्ताव पर भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों ने अपनी सहमति जताई और सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव सदन में पारित हो गया। अब इस प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। इस संकल्प प्रस्ताव को सर्वप्रथम कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध ने सदन में सबके समक्ष रखा, जिस पर सभी की सहमति बन गई।

गुरुवार को इस शीतकालीन सत्र का प्राइवेट मेंबर्स डे था और इस गैर सरकारी सदस्य कार्य संकल्प को इसी दिन सदन में पारित किया गया। गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के बारे में एक नीति बनाने पर विचार करने के लिए अनिरुद्ध सिंह ने प्राइवेट मेंबर्स डे के दिन को चुना और सदन में यह संकल्प लेकर आए। इस बारे में अनिरुद्ध ने सदन में कहा कि गोमाता का इस्तेमाल करने के बाद लोग उसे लावारिस छोड़ देते हैं इसलिए इस प्रस्ताव को केंद्र में भेजा जाना चाहिए।

इस प्रस्ताव पर सहमति जताने वाले पशुपालन मंत्री वीरेंद्र ने बताया कि वर्ष 2011-12 के मुताबिक, पूरे हिमाचल में 21 लाख 49 हजार गायें पंजीकृत की गई थी। इनमें से 40 हजार गाय सड़कों पर हैं, गोशालाओं में केवल 10 हजार गाय ही हैं। हिमाचल प्रदेश में इन बेसहारा और लावारिस गायों के लिए शेल्टर और चारे की व्यवस्था सरकार की ओर से की जाने को लेकर एक पहल की जा रही है।

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