डॉक्टरों की लापरवाही से बनी जिंदा लाश

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किसी भी महिला के लिए मां बनना किसी सपने से कम नहीं होता। मां बनना सबसे सुंदर अनुभव में से एक होता है, लेकिन एक महिला के लिए यह काफी भारी पड़ गया और वह ज़िंदा लाश बन गई। दरअसल, वर्ष 2009 में श्रद्धा शाह मां बनने वाली थी, लेकिन उसका सपना पूरा नहीं हो सका। चिकित्सकीय लापरवाही के कारण वह एनेस्थिसिया के डोज़ से बाहर ही नहीं आ सकी। इस घटना के 9 वर्ष बाद राज्य के उपभोक्ता फोरम ने दो डॉक्टरों की लापरवाही मानते हुए उन पर 32 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

श्रद्धा शाह ने 2009 में डॉ.निलेश त्रिवेदी से संपर्क किया। डॉक्टर ने उन्हें सी-सेक्शन की सलाह दी। डॉ. हिमांशु पटेल ने श्रद्धा को एनेस्थिसिया दिया और डॉ.निलेश ने सर्जरी की। श्रद्धा ने एक लड़के को जन्म दिया और उसे ओटी से बाहर लाया गया, परंतु वह होश में नहीं आई। एनेस्थिसिया के ओवरडोज़ से उसका दिमाग डैमेज हो गया। उसे हार्ट अटैक आ गया। उसके बाद श्रद्धा सिर्फ ज़िंदा लाश बनकर रह गई।

श्रद्धा के घरवालों ने दोनों डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया। डॉक्टरों ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञों को नई तकनीक की जानकारी होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अस्पताल में वेंटिलेटर तक नहीं था। डॉक्टरों ने सी-सेक्शन के पहले से लेकर बाद तक लापरवाही की। मरीज़ का ऑक्सिजन लेवल तक नहीं देखा। श्रद्धा अपने भाई और मां के साथ गुजरात में रहती है, जबकि पति और बच्चे मुंबई में रहते हैं।

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