कांग्रेस ने पूछा मोदी सरकार से फिर 1 सवाल

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देश में होने जा रहे चुनाव में विपक्ष के पास मुख्य मुद्दा है ‘नोटेबंदी और जीएसटी’ का। और हो भी क्यों ना,हाल ही में आरटीआई के माध्यम से पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए आरबीआई ने बताया कि  “लोन डिफॉल्ट्स के मामले बीते साल मार्च से ज्यादा बढ़े हैं।” लोन डिफॉल्ट्स के बढ़ते मामले सूक्ष्म और लघु उद्योगों के नुकसान को दर्शाते है। दरअसल सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लोन डिफॉल्ट्स में से 65.32 प्रतिशत हिस्सा सरकारी बैंकों का है।

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार सूक्ष्म और लघु उद्योगों का लोन डिफॉल्ट मार्जिन मार्च 2017 के 8249 करोड़ रुपए के मुकाबले मार्च 2018 तक बढ़कर 16118 करोड़ रुपए यानि कि लगभग दोगुना हो गया है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों का एनपीए 82382 करोड़ रुपए से बढ़कर मार्च 2018 तक 98500 करोड़ रुपए हो गया है। उल्लेखनीय है कि यह लोन सूक्ष्म उद्योगों को प्लांट और मशीनरी में निवेश के लिए दिया जाता है, जो कि 25 लाख से लेकर 5 करोड़ तक हो सकता है। लोन डिफॉल्ट्स के प्रकरण पिछले वर्ष मार्च से बढ़ गए है।

8 नवंबर, 2016 को सरकार ने 500 और 1000 के नोटों पर बैन लगा देने के बाद अचानक लिए गए इस फैसले से बाजार में नकदी की किल्लत हो गई, जिस कारण देश की जीडीपी को भी 1.5 प्रतिशत का घाटा उठाना पड़ा था। मोदी सरकार के इस निर्णय के बाद विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया था, और अभी भी  कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बना रखा है। हाल ही में आरबीआई द्वारा जारी की गई रिपोर्ट पर कांग्रेस ने मोदी सराकर से ट्वीट कर के सवाल किया है।

कांग्रेस द्वारा अपने ऑफिशिअल ट्वीटर पेज से आरबीआई की इस रिपोर्ट को साझा करते हुए लिखा कि “अब तो साबित हो गया है कि नोटबंदी और जीएसटी ने छोटे और मझोले उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। क्या मोदी सरकार इसका कोई जवाब देगी?”

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